KNEWS DESK- वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व आज, शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। यही दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है, जो इसे और अधिक पवित्र बना देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पूजा-पाठ, स्नान और दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों में कमी आती है।
आत्म-शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का समय
वैशाख पूर्णिमा को आत्म-शुद्धि और ईश्वर की कृपा पाने का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और श्रद्धा से किए गए धार्मिक कार्य मन की नकारात्मकता को दूर करते हैं। जब व्यक्ति सही समय पर पूजा और संकल्प करता है, तो उसके भीतर नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।
स्नान और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
इस पावन दिन पर विभिन्न कार्यों के लिए विशेष समय निर्धारित किए गए हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह 04:15 बजे से 04:58 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त पूजा: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल 2026, रात 09:12 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 मई 2026, रात 10:52 बजे
- चंद्रोदय समय: शाम 06:52 बजे
इन शुभ समयों में किए गए स्नान, जप और पूजा विशेष फलदायी माने जाते हैं।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य का महत्व
पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में होता है, इसलिए इस दिन चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। चांदी के पात्र में जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से कुंडली के चंद्र दोष दूर होते हैं और मन का तनाव कम होता है।
खुले आसमान के नीचे कुछ समय शांत मन से बिताना और ध्यान करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। चंद्रमा की शीतल किरणें शरीर और मन दोनों को सुकून देती हैं।
दान और सेवा: पुण्य कमाने का सर्वोत्तम मार्ग
वैशाख मास में बढ़ती गर्मी के कारण इस दिन दान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शास्त्रों में जलदान को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है। इस दिन निम्न कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, ठंडा पानी पिलाना, मंदिर में मिट्टी के घड़े का दान करना, जरूरतमंदों को पंखा, खरबूजा या सत्तू देना। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।
परोपकार और भक्ति से जीवन में खुशहाली
वैशाख पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और मानव सेवा का संदेश देने वाला दिन है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे अच्छे कार्य भी बड़े फल प्रदान करते हैं। भक्ति, ध्यान और सेवा के माध्यम से हम अपने जीवन को अधिक सार्थक और शांतिपूर्ण बना सकते हैं।