Vaisakh Month 2026: वैशाख माह के पावन महीने में करें इन 4 देवताओं की पूजा, चमक सकती है आपकी किस्मत!

KNEWS DESK- पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा के समापन के साथ ही वैशाख माह का आरंभ हो जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र महीना 3 अप्रैल से 1 मई तक रहेगा। धार्मिक ग्रंथों में, विशेषकर स्कंद पुराण में, वैशाख मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए दान, तप और पूजा का फल कई जन्मों तक मिलता है।

अक्सर लोग इसे केवल भगवान विष्णु की उपासना का महीना मानते हैं, लेकिन धर्मशास्त्रों के अनुसार इस समय कुछ अन्य देवताओं की आराधना भी अत्यंत फलदायी होती है।

भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है अक्षय पुण्य

वैशाख माह में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस पूरे महीने व्रत, दान और विधिपूर्वक पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से एकादशी, अक्षय तृतीया और पूर्णिमा के दिन श्रीहरि की आराधना करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

भगवान शिव की आराधना से दूर होते हैं कष्ट

इस माह में भगवान शिव की पूजा भी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के दुख-दर्द दूर करते हैं। जो लोग मानसिक तनाव, बाधाओं या परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए शिव भक्ति विशेष फलदायी मानी गई है।

सूर्य देव की उपासना से मिलता है स्वास्थ्य और तेज

वैशाख महीने में सूर्य देव की पूजा का भी खास महत्व है। प्रतिदिन सुबह स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, सूर्य देव की कृपा से आत्मविश्वास, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

हनुमान जी की भक्ति से मिलती है शक्ति और सफलता

वैशाख माह में हनुमान जी की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, संकट और शत्रु बाधाएं समाप्त होती हैं। हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति को साहस, बल और सफलता प्राप्त होती है।

वैशाख माह में क्या करें विशेष उपाय

  • प्रतिदिन स्नान के बाद दान-पुण्य करें।
  • गरीबों को जल, अन्न और वस्त्र दान दें।
  • व्रत और संयम का पालन करें।
  • मन को शांत और सकारात्मक रखें।

वैशाख माह केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का श्रेष्ठ अवसर है। इस दौरान भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव, सूर्य और हनुमान जी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता का मार्ग खुल सकता है।