KNEWS DESK- हिंदू पंचांग के अनुसार आज 15 जून को सोमवती अमावस्या का पावन पर्व मनाया जा रहा है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस तिथि को बेहद शुभ माना गया है। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, पितृ तर्पण और भगवान शिव की आराधना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार सुबह के समय किए जाने वाले स्नान और दान का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व शाम के समय दीपदान का माना गया है। मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
क्यों जरूरी माना जाता है शाम के समय दीपदान?
सनातन परंपरा में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। अमावस्या की रात अंधकार का प्रतीक होती है, इसलिए इस दिन दीपक जलाकर अज्ञान और नकारात्मकता को दूर करने का संदेश दिया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या की शाम को दीपदान करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दीपदान देवी-देवताओं और पितरों को प्रसन्न करता है।
पितरों की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय
अमावस्या तिथि को पितरों की तिथि माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर तिल के तेल या घी का दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
जिन लोगों को पितृ दोष, पारिवारिक कलह या जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उनके लिए सोमवती अमावस्या का दीपदान विशेष लाभकारी माना गया है।
धन-संपत्ति और सुख-समृद्धि का मिलता है आशीर्वाद
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक दीपदान करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे घर में आर्थिक उन्नति के रास्ते खुलते हैं और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
इसी कारण कई श्रद्धालु इस दिन मंदिरों, नदी घाटों, पीपल वृक्ष और तुलसी के पौधे के पास दीपदान करते हैं। ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है दीपदान
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमावस्या के दिन वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। ऐसे में दीपक का प्रकाश सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और मानसिक तनाव, भय तथा नकारात्मक विचारों को दूर करने में मदद करता है।
मान्यता है कि नियमित रूप से दीपदान करने वाले परिवारों में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है।
ऐसे करें सोमवती अमावस्या पर दीपदान
- शाम के समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव, माता पार्वती और अपने पितरों का स्मरण करें।
- तिल के तेल या घी का दीपक जलाएं।
- दीपक को मंदिर, तुलसी, पीपल वृक्ष या पूजा स्थल पर स्थापित करें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और पितरों के आशीर्वाद की प्रार्थना करें।
- सामर्थ्य अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दें।
सोमवती अमावस्या केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, पितृ सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी विशेष अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया दीपदान जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और पितरों का आशीर्वाद लेकर आता है।