Parama Ekadashi 2026: मलमास की परमा एकादशी पर मिलेगा दुर्लभ पुण्य, जानें व्रत की तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

KNEWS DESK- हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन अधिकमास में पड़ने वाली परमा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ फल देने वाली एकादशी माना जाता है। यह व्रत हर तीन वर्ष में आने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) में पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता, कष्ट और पापों का नाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस विशेष माह में पड़ने वाली पद्मिनी और परमा एकादशी का धार्मिक महत्व सामान्य एकादशी से कहीं अधिक माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने वाले भक्तों पर भगवान विष्णु विशेष कृपा बरसाते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

परमा एकादशी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जून 2026 को रात 12:58 बजे शुरू होगी और 11 जून 2026 को रात 10:37 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

व्रत पारण का समय

परमा एकादशी व्रत का पारण 12 जून 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक रहेगा।

परमा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत हजारों यज्ञों के समान पुण्यफल प्रदान करता है। यह व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाने, आर्थिक परेशानियों को दूर करने और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना गया है। इस दिन किए गए जप, तप, ध्यान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है।

परमा एकादशी पूजन विधि

परमा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर पंचामृत से अभिषेक करें। पूजा में पीले पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि के मंत्रों तथा परमा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित करें। मान्यता है कि विधिपूर्वक किए गए इस व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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