KNEWS DESK- करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। लेकिन अगर आसमान में बादल हों या चांद दिखाई न दे, तो क्या करें? जानिए ऐसी स्थिति में अपनाए जाने वाले 5 उपाय और करवा चौथ 2026 के पूजा मुहूर्त से जुड़ी जानकारी।
करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत का पालन करती हैं। शाम को करवा चौथ की पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। हालांकि, कई बार मौसम खराब होने, बादल छाए रहने या अन्य कारणों से चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि चंद्र दर्शन के बिना व्रत का पारण कैसे किया जाए। धार्मिक परंपराओं में ऐसी परिस्थितियों के लिए कुछ वैकल्पिक उपाय बताए जाते हैं। इन्हें अपनाने से पहले अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पंडित से सलाह लेना उचित रहेगा।
करवा चौथ 2026: जानें तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
साल 2026 में करवा चौथ का त्योहार 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन चतुर्थी तिथि, पूजा के समय और चंद्रोदय से जुड़ी जानकारी इस प्रकार है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 1:06 बजे।
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे।
- करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से शाम 6:56 बजे तक।
- चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 8:17 बजे।
चंद्रोदय का समय शहर और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र के अनुसार चंद्रमा निकलने का सही समय जरूर जांचना चाहिए।
करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा पति की लंबी उम्र, वैवाहिक सुख और परिवार की समृद्धि की कामना से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को शीतलता, मन और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण महिलाएं चंद्रमा की पूजा करने के बाद पति के चेहरे को छलनी से देखकर अपना व्रत खोलती हैं। इस परंपरा को पति-पत्नी के प्रेम और विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है।
चांद न दिखे तो इन 5 उपायों से करें व्रत का पारण
भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का स्मरण करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हैं। अगर मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहा है, तो भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने पूजा करके चंद्रदेव का स्मरण कर सकती हैं। अर्घ्य और व्रत के पारण की विधि के लिए अपने परिवार की परंपरा या पंडित की सलाह लें।
अक्षत से चंद्रमा की आकृति बनाएं
कुछ धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा के प्रतीक के रूप में चावल यानी अक्षत से आकृति बनाने का विकल्प अपनाया जाता है। इसके लिए साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर अक्षत से चंद्रमा की आकृति बनाई जा सकती है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक चंद्रदेव का स्मरण और मंत्र जाप करें। इस विधि को अपनाने से पहले स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार जानकारी लेना उचित है।
चांदी के सिक्के को प्रतीक मानकर पूजा करें
कुछ लोग चंद्रमा के प्रतीक के रूप में चांदी के सिक्के या गोल आकार की वस्तु का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी स्थिति में इसे स्वच्छ स्थान पर रखकर चंद्रदेव का स्मरण किया जा सकता है। हालांकि, यह सभी परंपराओं में मान्य एक समान विधि नहीं है, इसलिए अपने परिवार में प्रचलित रीति के अनुसार ही पूजा करें।
दूसरे स्थान पर चंद्र दर्शन की जानकारी लें
अगर आपके आसपास बादल छाए हैं, लेकिन किसी नजदीकी क्षेत्र में आसमान साफ है, तो वहां से चंद्र दर्शन की जानकारी ली जा सकती है। कुछ लोग दूसरे स्थान पर चांद निकलने की तस्वीर या वीडियो देखकर पूजा करने का विकल्प भी अपनाते हैं। हालांकि, वीडियो कॉल या तस्वीर के माध्यम से दर्शन करना पारंपरिक चंद्र दर्शन के समान मान्य है या नहीं, यह स्थानीय धार्मिक परंपरा पर निर्भर कर सकता है।
चंद्रमा की दिशा में प्रणाम करके प्रार्थना करें
अगर चंद्रमा बादलों के पीछे छिपा हो और दिखाई न दे रहा हो, तो निर्धारित चंद्रोदय समय के बाद चंद्रमा की दिशा की ओर मुंह करके श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की जा सकती है। चंद्रदेव का स्मरण करते हुए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा और पारण की विधि अपनाएं। यदि सही विधि को लेकर असमंजस हो, तो स्थानीय पंडित से मार्गदर्शन लेना बेहतर रहेगा।
करवा चौथ पर चंद्रमा का दिखाई न देना कई बार मौसम से जुड़ी सामान्य स्थिति होती है। ऐसे में घबराने के बजाय अपने क्षेत्र का चंद्रोदय समय जांचें और परिवार में प्रचलित धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करें। व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर या तबीयत बिगड़ने जैसी परेशानी हो, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें।