KNEWS DESK- हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन ज्येष्ठ पूर्णिमा को पितरों की कृपा प्राप्त करने और पितृ दोष की शांति के लिए बेहद शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की उपासना के साथ पितरों के निमित्त किए गए विशेष उपाय जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो तो उसे जीवन में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर तिल से जुड़े कुछ सरल उपाय बेहद प्रभावी माने गए हैं।
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026 को सुबह 11:57 बजे प्रारंभ होगी और 31 मई 2026 को दोपहर 2:14 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पूर्णिमा व्रत 31 मई 2026 को रखा जाएगा। इस दिन स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
पितृ दोष शांति के लिए करें ये उपाय
काले तिल के लड्डू का अर्पण
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पितरों के देवता अर्यमा का स्मरण करते हुए काले तिल से बने लड्डू अर्पित करें। मान्यता है कि इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष के प्रभाव कम होने लगते हैं।
पीपल वृक्ष पर तिल मिश्रित दूध चढ़ाएं
दूध में काले तिल मिलाकर पीपल वृक्ष की जड़ में अर्पित करें। इस दौरान अपने पितरों का ध्यान करें और उनके मोक्ष एवं शांति की प्रार्थना करें। यह उपाय पारिवारिक कलह और आर्थिक रुकावटों को दूर करने वाला माना जाता है।
तिल युक्त दीपक जलाएं
शाम के समय पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें कुछ काले तिल डाल दें। इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए ‘पितृभ्य नमः’ मंत्र का कम से कम 27 बार जाप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
क्यों महत्वपूर्ण है ज्येष्ठ पूर्णिमा?
मान्यता है कि पितरों की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति बनी रहती है। वहीं पितृ दोष शांत होने पर करियर, विवाह, संतान और आर्थिक मामलों में आने वाली बाधाएं भी कम होने लगती हैं। इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा को दान, जप, तप और पितृ तर्पण के लिए विशेष फलदायी माना गया है।