KNEWS DESK- हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं. पूजा के दौरान लाल-हरे वस्त्र, चूड़ियां और मेहंदी का विशेष महत्व बताया गया है. जानिए इन परंपराओं के पीछे की मान्यता और तीज पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

हरतालिका तीज का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस पर्व पर महिलाएं कठिन उपवास करती हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं. हरतालिका तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई ऐसी परंपराएं भी हैं, जिनका महिलाओं के जीवन में खास स्थान है. मेहंदी लगाना, सोलह श्रृंगार करना और शुभ रंगों के वस्त्र पहनना इसी का हिस्सा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन परंपराओं के जरिए महिलाएं अपने सुहाग और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं.
तीज पर लाल और हरा रंग पहनने की क्या है मान्यता?
हरतालिका तीज पर लाल और हरे रंग के कपड़े पहनने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं में लाल रंग को प्रेम, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है. वहीं, हरा रंग हरियाली, समृद्धि और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है.
इसी वजह से तीज के दिन महिलाएं लाल या हरे रंग की साड़ी, लहंगा अथवा अन्य पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं. इन रंगों की चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री भी धारण की जाती है. मान्यता है कि शुभ रंगों के साथ पूजा करने से मन में सकारात्मकता और भक्ति का भाव बढ़ता है. हालांकि, लाल और हरे वस्त्र पहनना सभी महिलाओं के लिए अनिवार्य नहीं है. यह एक पारंपरिक मान्यता है, जिसका पालन महिलाएं अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा के अनुसार करती हैं.
मेहंदी और सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व
हरतालिका तीज पर मेहंदी लगाना भी शुभ माना जाता है. महिलाएं हाथों और पैरों पर मेहंदी रचाती हैं और इसे सुहाग की निशानी के रूप में देखती हैं. तीज के अवसर पर मेहंदी लगाने की परंपरा महिलाओं के श्रृंगार और उत्सव की खुशी से भी जुड़ी है. इस दिन माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने का विधान बताया जाता है. इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, महावर, कंघी, काजल और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल हो सकती हैं. महिलाएं माता पार्वती से अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं.
शिव-पार्वती की पूजा और व्रत कथा का विधान
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. महिलाएं अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं. पूजा के दौरान शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें फूल, फल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है. पूजा के बाद हरतालिका तीज की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी. इसी कथा से हरतालिका तीज का संबंध बताया जाता है. कई स्थानों पर महिलाएं रात में जागरण भी करती हैं. भजन-कीर्तन, आरती और कथा के साथ व्रत पूरा करने की परंपरा निभाई जाती है.
तीज पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
हरतालिका तीज के दिन पूजा और व्रत से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की परंपरा है. हालांकि, इन नियमों में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर हो सकता है.
- पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई का ध्यान रखें.
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करें.
- व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें.
- माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें.
- घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें.
- पूजा के दौरान मन को शांत रखें और किसी के प्रति कटु भाव न रखें.
कई परिवारों में तीज के दिन बाल कटवाने, काले या सफेद कपड़े पहनने और कुछ विशेष कार्यों से बचने की परंपरा होती है. इनका पालन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार किया जाता है.
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं रखें सेहत का ध्यान
हरतालिका तीज का निर्जला व्रत कठिन माना जाता है. इसमें पूरे दिन अन्न और जल का त्याग किया जाता है. हालांकि, हर महिला के लिए निर्जला व्रत रखना जरूरी नहीं है. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, गर्भावस्था या अन्य चिकित्सकीय स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है. धार्मिक आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है. महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रख सकती हैं और पूजा में श्रद्धा के साथ शामिल हो सकती हैं.
हरतालिका तीज पर क्यों खास है शिव-पार्वती का पूजन?
हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम, तपस्या और वैवाहिक जीवन का प्रतीक मानी जाती है. इस दिन महिलाएं माता पार्वती की तरह अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-शांति की कामना करती हैं. लाल-हरे वस्त्र, मेहंदी और सोलह श्रृंगार इस पर्व की सुंदरता बढ़ाते हैं, वहीं पूजा, कथा और भक्ति इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं. श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार इस पर्व को मनाते हैं और भगवान शिव-पार्वती से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.