KNEWS DESK – भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश उत्सव की शुरुआत होने जा रही है. देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं. भक्त अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना करने की तैयारी में जुटे हैं.
गणेश जी की पूजा में दूर्वा, मोदक और लाल फूल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति पूजन में तुलसी पत्र अर्पित करना वर्जित है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसमें देवी तुलसी और भगवान गणेश के बीच विवाह प्रस्ताव को लेकर विवाद का वर्णन मिलता है.
गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे होगी और इसका समापन 15 सितंबर, मंगलवार को सुबह 7:44 बजे होगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए 14 सितंबर को गणेश जी की स्थापना और पूजा करना शुभ माना जाएगा.
जब तपस्या में लीन गणेश जी से मिलीं तुलसी
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश नदी के किनारे गहरे ध्यान में लीन थे. उन्होंने सुंदर वस्त्र धारण किए हुए थे और उनके गले में दिव्य माला सुशोभित थी.
उसी समय वहां से देवी तुलसी गुजर रही थीं. गणेश जी के तेजस्वी और आकर्षक स्वरूप को देखकर वह उनसे प्रभावित हो गईं. उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा जागी. इसी उद्देश्य से उन्होंने गणेश जी की तपस्या भंग कर दी.
विवाह प्रस्ताव ठुकराने पर तुलसी ने दिया श्राप
ध्यान से उठने के बाद भगवान गणेश के सामने तुलसी जी ने विवाह का प्रस्ताव रखा. गणेश जी ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए विनम्रता से विवाह करने से इनकार कर दिया.
कथा के अनुसार, इस बात से तुलसी जी क्रोधित हो गईं और उन्होंने गणेश जी को श्राप दिया कि उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके दो विवाह होंगे. इस श्राप से भगवान गणेश भी नाराज हो गए और उन्होंने तुलसी जी को भी श्राप दे दिया.
गणेश जी ने तुलसी को दिया असुर से विवाह का श्राप
भगवान गणेश ने तुलसी जी को श्राप दिया कि उनका विवाह किसी देवता से नहीं, बल्कि एक असुर से होगा. यह सुनकर तुलसी जी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी.
तुलसी जी की प्रार्थना सुनकर गणेश जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया. उन्होंने कहा कि तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रिय होंगी और कलियुग में मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाएंगी.
गणेश पूजन में तुलसी क्यों है वर्जित?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश ने तुलसी जी को क्षमा तो कर दिया, लेकिन अपनी पूजा में तुलसी पत्र चढ़ाने से मना किया. इसी वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी अर्पित करना वर्जित माना जाता है.
गणपति बप्पा की पूजा में दूर्वा घास, मोदक और लाल फूल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है. भक्त इन वस्तुओं को श्रद्धा से अर्पित कर भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं.
डिस्क्लेमर: यह लेख पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य भारतीय धार्मिक परंपराओं से जुड़ी जानकारी प्रदान करना है. मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं.