Dhanteras 2026: धनतेरस पर पैसे उधार देना शुभ या अशुभ? जानें क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं

धनतेरस का पर्व 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर पैसों का लेनदेन करने से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं कि इस दिन किसी को पैसे उधार देना चाहिए या नहीं।

KNEWS DESK- दिवाली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इसके अलावा, परिवार के कल्याण और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना के लिए शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा भी है।

धनतेरस को खरीदारी के लिए भी शुभ माना जाता है। इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, धनिया और मिट्टी के दीये जैसी चीजें खरीदते हैं। हालांकि, इस पर्व पर पैसों के लेनदेन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। खासतौर पर यह जानने की उत्सुकता रहती है कि धनतेरस के दिन किसी को पैसे उधार देना उचित है या नहीं। आइए जानते हैं कि इस बारे में प्रचलित धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं।

धनतेरस पर पैसे उधार देना चाहिए या नहीं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन किसी दूसरे व्यक्ति को नकद धन उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन घर से धन बाहर जाने को आर्थिक समृद्धि के लिहाज से शुभ नहीं माना जाता। हालांकि, यह धार्मिक परंपरा और लोकमान्यता का विषय है, इसे आर्थिक नियम या निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखना चाहिए।

पैसे उधार देने से क्यों किया जाता है परहेज?

प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा करके घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि की कामना की जाती है। ऐसे में कुछ लोग इस दिन नकद धन उधार देने या अनावश्यक रूप से पैसे बाहर भेजने से बचते हैं। माना जाता है कि इससे घर की बरकत बनी रहती है। हालांकि, इस मान्यता का अर्थ यह नहीं है कि किसी की जरूरी आर्थिक मदद करना अशुभ है।

नकद धन का दान करने से बचने की मान्यता

धनतेरस पर कुछ परिवार नकद रुपये या सिक्कों का दान करने से भी परहेज करते हैं। उनके अनुसार, इस दिन धन को घर में बनाए रखना शुभ होता है। हालांकि, दान-पुण्य की परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए इसे सभी के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए।

पुराना कर्ज चुकाना माना जाता है शुभ

धनतेरस पर जहां कुछ लोग दूसरों को उधार देने से बचते हैं, वहीं पहले से लिए गए कर्ज को चुकाने या पुराने बकाया बिलों का भुगतान करने को लेकर अलग मान्यता है। कुछ लोग इसे आर्थिक जिम्मेदारियों को कम करने और नए सिरे से शुरुआत करने का प्रतीक मानते हैं। हालांकि, कर्ज चुकाने का निर्णय अपनी आर्थिक स्थिति और भुगतान की क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

किन चीजों के लेनदेन से बचने की है मान्यता?

कुछ प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में धनतेरस के दिन नकदी के अलावा नमक, तेल, घी, चीनी, लोहा, कांच और धारदार वस्तुओं का दान या लेनदेन करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इन मान्यताओं का पालन करना व्यक्ति की आस्था और पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर करता है।

धनतेरस पर खरीदारी के लिए भुगतान करना अशुभ नहीं

धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। ऐसे में दुकान पर सामान खरीदने के लिए नकद भुगतान करना सामान्य खरीदारी का हिस्सा है। इसे किसी को उधार देने के समान नहीं माना जाता। इसलिए इस दिन खरीदारी करते समय भुगतान करने को लेकर अनावश्यक भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है।

कुल मिलाकर, धनतेरस पर पैसे उधार देने से बचने की मान्यता मां लक्ष्मी और धन-संपन्नता से जुड़ी धार्मिक धारणाओं पर आधारित है। हालांकि, किसी जरूरतमंद की मदद करना, जरूरी बिल चुकाना या आर्थिक जिम्मेदारियां निभाना परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करने के साथ-साथ व्यावहारिक जरूरतों और अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

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