उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन बीजेपी, कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों को रफ्तार दे दी है। एक तरफ कांग्रेस देहरादून से लेकर दिल्ली तक बैठकों के जरिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है,तो दूसरी तरफ बीजेपी भी दिल्ली में बड़े नेताओं के साथ मंथन के बाद अब प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें कर संगठन को चुनावी मोड में ला रही है। मुख्य तौर पर बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही राष्ट्रीय दलों की नजर एक बार फिर सत्ता पर है। बीजेपी जहां सरकार के कामकाज, संगठन की मजबूती और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को अपना आधार बना रही है,वहीं कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान तैयार करने में जुटी है। रोजगार, महंगाई, पलायन, विकास, कानून-व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दे, खासकर Gen-Z की अपेक्षाएं, आगामी विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दोनों दलों का फोकस विधानसभा सीटों की स्थिति, संगठन की सक्रियता, बूथ स्तर की तैयारियों और कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार करने पर है। वहीं, आने वाले महीनों में टिकट को लेकर दावेदारी, संगठन में संभावित बदलाव, नेताओं की सक्रियता और विधानसभा सीटों के समीकरणों का आकलन उत्तराखंड की सियासत को और दिलचस्प बना सकता है। इस बीच दोनों दल अपनी बैठकों में हो रहे मंथन और तैयारियों के आधार पर जीत के दावे भी कर रहे हैं, जिसके चलते आरोप-प्रत्यारोप और सियासी बयानबाजी का दौर भी तेज होता दिखाई दे रहा है.
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन सियासी जमीन अभी से गर्म हो चुकी है और मैदान में उतर चुके हैं. बीजेपी और कांग्रेस। कांग्रेस इस बार देहरादून से दिल्ली तक बैठकों की झड़ी लगा रही है। पार्टी का टारगेट साफ है संगठन को दुरुस्त करना और सरकार को मुद्दों पर घेरना। उधर बीजेपी भी फुल एक्शन में है। केंद्र के बड़े नेताओं से दिल्ली में रणनीति तय करने के बाद अब प्रदेश के हर जिले में बैठकें शुरू हो गई हैं। बीजेपी का फोकस डबल इंजन सरकार की योजनाओं, विकास के काम और मजबूत संगठन पर है। इसी तर्ज पर बीते दिन प्रदेश कांग्रेस की दिल्ली हाईकमान के साथ हुई बैठक में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल,सहित अन्य बड़े मौजूद रहे। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन के कार्यक्रमों और एसआईआर के मुद्दों पर चर्चा की गई। वही उत्तराखंड बीजेपी मुख्यालय देहरादून में आज एक अहम संगठनात्मक बैठक हो रही है, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। इस बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीतियों, सांगठनिक कार्यों, चुनावी तैयारियों, लोकसभा और सांगठनिक क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को लेकर समीक्षा व महामंथन किया जा रहा है। दोनो दल अपनी अपनी तैयारियों को लेकर दावे करते नज़र आ रहे है, इस बीच आपसी तंज और पलटवार का सिलसिला भी देखने को मिल रहा है।
कुल मिलाकर कहें तो 2027 का विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन उत्तराखंड की सियासत ने अभी से रफ्तार पकड़ ली है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। एक तरफ बीजेपी सरकार के काम और केंद्र-राज्य की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, पलायन और युवाओं के मुद्दों को हवा देकर सत्ता में वापसी की राह तलाश रही है। आने वाले महीनों में टिकट की दावेदारी, संगठन में फेरबदल और नेताओं के दौरे इस लड़ाई को और धार देंगे। बूथ स्तर से लेकर विधानसभा सीटों तक का समीकरण तय करेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है। फिलहाल दोनों दल जीत के दावे कर रहे हैं और बयानबाजी भी तेज है। ऐसे में उत्तराखंड की जनता किस दल के किन मुद्दों पर ध्यान देती है, यही तय करेगा कि 2027 में सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है।