उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन भले अभी बाकी है, लेकिन प्रदेश की सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई है. हर दल जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ साथ अपनी संगठनात्मक संरचना को दुरुस्त करने में जुट गया है. प्रदेश में चुनाव की बात आते ही मुकाबला हमेशा भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जाता है. इसी के चलते बैठकों और आयोजनों के बाद भाजपा व कांग्रेस अब संगठन विस्तार पर फोकस कर रहे हैं. और सदस्यता अभियान के साथ साथ पुराने कार्यकर्ताओं को साथ रखने की कवायद भी चल रही है. इसी कड़ी में लम्बे समय के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने अपनी नई जंबो कार्यकारिणी और 5 नई समितियों की घोषणा कर दी है, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की इस नई टीम में 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव बनाए गए हैं. वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत समेत 41 वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी समिति में जगह मिली है. दूसरी ओर भाजपा ने भी अपनी टीम को बड़ा विस्तार दिया है. प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्थायी आमंत्रित, विशेष आमंत्रित और प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों की सूची जारी की है. इसमें 25 नेताओं को स्थाई आमंत्रित यानी पदेन सदस्य, 32 को विशेष आमंत्रित सदस्य और 121 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है, टोटल 178 नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. कुल मिलाकर भाजपा और कांग्रेस दोनों का मकसद एक ही है नज़र आ रहा है कि 2027 से पहले बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाये. वही भले ही संगठन विस्तार का विषय दोनो दलों का अंधरूनी मामला हो लेकिन इस बीच दोनो दलों में आपसी बयानबाज़ी भी देखी जा रही है. जहां दोनो दल अपनी अपनी कार्यकारिणी पर खुश है वही एक दूसरे पर तंज भी कस्ते नज़र आ रहे है. जिसके चलते आपसी बयानबाज़ी और दावे भी सामने आ रहे है.
उत्तराखंड में 2027 का चुनावी बिगुल भले न बजा हो, पर भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों में हलचल तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस के लिए उत्तराखंड में चुनाव का मतलब हमेशा सीधा टकराव रहा है. इसी वजह से अब दोनों दल तमाम आयोजनों के बाद संगठन विस्तार में जुटे हैं. वही सदस्यता बढ़ाने के साथ पुराने कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश भी चल रही है. इसी क्रम में कांग्रेस ने भाजपा के काफी तंज सुनने व लम्बे समय के बाद अपनी कार्यकारिणी उतारी है. इधर, भाजपा भी पीछे नहीं है. भाजपा ने टीम का विस्तार कर 25 पदेन सदस्य, 32 विशेष आमंत्रित और 121 कार्यसमिति सदस्य घोषित किए है, यानी कुल 178 नेताओं को नई जिम्मेदारी दी गई है. लेकिन इस बीच दोनों दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप भी देखा जा रहा है. भाजपा कांग्रेस की नई जंबो कार्यकारिणी पर तंज कसती नज़र आ रही हैं, भाजपा के अनुसार 36 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव, 74 सचिव के साथ इतनी बड़ी कार्यकारिणी बना देने से यही लगता है हर कार्यकर्ता को कुछ न कुछ बनाना पड़ रहा है, और कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को खुश करने में लगी हुई है, जो संगठन चलाने का कोई बिंदु नही है. वही कांग्रेस की मानें तो भाजपा की अंदरूनी स्थिति खराब है, और भाजपा नेताओं में आपसी समन्वय की कमी है. जिसके चलते भाजपा अपने नेताओं को खोने के डर से इतनी देर से पद देने का बहाना बना रही है. वही, दोनो दलों में जमकर राजनीति भी होती दिख रही है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन नींव अभी से रखी जा रही है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. सदस्यता अभियान, बैठकें और अब ये बड़े-बड़े विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा हैं. कांग्रेस अपनी जंबो कार्यकारिणी के जरिए हर वर्ग और हर क्षेत्र को साधने की कोशिश में है, तो भाजपा छोटे कद की लेकिन संतुलित टीम के साथ अनुशासन और समन्वय का संदेश दे रही है. लेकिन इस पूरे विस्तार के बीच बयानबाजी भी तेज है. एक दूसरे पर तंज, दावे और पलटवार से साफ है कि सियासी तापमान बढ़ चुका है. अब देखना होगा कि ये संगठनात्मक मजबूती जमीन पर कितनी वोट में तब्दील होती है. क्योंकि चुनाव बूथ पर ही जीते और हारे जाते हैं. फिलहाल दोनों दल 2027 के लिए पूरी ताकत झोंकने के मूड में नजर आ रहे हैं।