रेखा आर्य के पति से जुड़े धोखाधड़ी केस में कल्पना मिश्रा को राहत, 50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर दर्ज मामले में कल्पना मिश्रा को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी देखने के बाद यह फैसला सुनाया।

Knews Desk- उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े चर्चित धोखाधड़ी मामले में आरोपी कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को जमानत मिल गई है। बरेली के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-8) अशोक कुमार यादव की अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

यह मामला मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में कल्पना पर मंत्री और उनके पति के नाम-पते का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करने, जालसाजी, चोरी और धन उगाही जैसे आरोप लगाए गए थे। कल्पना को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था।

मंत्री की शिकायत में क्या आरोप थे?

रेखा आर्य की ओर से आरोप लगाया गया था कि कल्पना मिश्रा ने अपने आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम और बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया। शिकायत के मुताबिक, कल्पना मंत्री के नाम और पद का सहारा लेकर लोगों पर प्रभाव डालती थीं और कथित तौर पर धन उगाही करती थीं।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि कल्पना जिस हुंडई क्रेटा कार से चलती थीं, उस पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगी थी। मामले में कल्पना और उनके कथित मौसा डॉ. आरसी पांडेय की गतिविधियों की जांच की मांग भी की गई थी।

सात लाख रुपये और सोने की माला चोरी का आरोप

शिकायत में बरेली स्थित आवास से सात लाख रुपये और सोने से जड़ी रुद्राक्ष की माला चोरी होने का आरोप भी शामिल था। इस मामले में बारादरी थाने में 9 सितंबर 2024 को मुकदमा दर्ज किया गया था। पहले विवेचना के बाद मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी, लेकिन बाद में दोबारा पैरवी के बाद जांच कराई गई।

इसके बाद कल्पना मिश्रा को 14 जुलाई 2026 को जेल भेजा गया। जमानत के लिए उनकी ओर से अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

कल्पना मिश्रा के वकील लवलेश पाठक ने अदालत में कहा कि गिरधारी लाल साहू ने कल्पना को अपने व्यापार में मैनेजर के पद पर नियुक्त किया था। इसके लिए 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध पत्र भी पेश किया गया। बचाव पक्ष के मुताबिक, उन्हें 25 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी दी गई थी।

वकील ने आरोप लगाया कि नौकरी के दौरान कल्पना का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण किया गया। उनकी निजी रकम भी हड़प ली गई। जब उन्होंने शिकायत करने की बात कही, तो प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्हें मुकदमे में फंसा दिया गया।

मंत्री पक्ष ने जमानत का किया विरोध

मंत्री की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि कल्पना ने तीन अलग-अलग बैनामों में रेखा आर्य के बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया था। इन दस्तावेजों में 10.50 लाख, 12 लाख और 19 लाख रुपये के लेनदेन का उल्लेख होने की बात कही गई।

अभियोजन ने अदालत के सामने यह आशंका भी जताई कि जमानत मिलने के बाद आरोपी साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।

दस्तावेजों और केस की स्थिति पर कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। कोर्ट के सामने कल्पना के गिरधारी लाल साहू की मैनेजर होने से संबंधित पंजीकृत अनुबंध भी पेश किया गया था।

अदालत ने माना कि आधार कार्ड में पता बदला जा सकता है, जबकि पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया होती है। उपलब्ध रिकॉर्ड में दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला।

कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय से विचारणीय है और कल्पना की पूर्व दोषसिद्धि से संबंधित कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने जमानत मंजूर कर ली।

जमानत के साथ कल्पना को सुनवाई में सहयोग करने और साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।

गिरधारी लाल साहू का नाम पहले भी रहा है चर्चा में

मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ गिरधारी पप्पू का नाम बरेली के चर्चित जैन हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है। वह इस मामले में आरोपी रहे हैं। इस प्रकरण में कोर्ट से फाइल गायब होने का आरोप भी सामने आया था, जिसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर फाइल दोबारा तैयार की गई।

गिरधारी लाल साहू बरेली में कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी शादियों, साहू समाज के सम्मेलनों और स्थानीय राजनीति में सक्रियता को लेकर भी उनका नाम सुर्खियों में आता रहा है। उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न मुकदमे समय-समय पर पुलिस और अदालत की प्रक्रिया से गुजरते रहे हैं।

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