डिजिटल डेस्क- अयोध्या के भव्य और दिव्य भगवान श्री रामलला मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी के मामले ने अब देशव्यापी राजनीतिक और धार्मिक तूल पकड़ लिया है। इस कथित घोटाले की गूंज के बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित त्रिसदस्यीय विशेष जांच दल की टीम सोमवार को सीधे अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर पहुंची और अपनी जांच शुरू कर दी। एक तरफ जहां इस मामले में तीखी राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ देश के सुप्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने इस विवाद पर गहरा दुख जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक बेहद महत्वपूर्ण मांग कर दी है।
“योगी जी! राम मंदिर से ही करें ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की शुरुआत”
वृंदावन के विख्यात कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने राम मंदिर में प्रशासनिक हस्तक्षेप और चंदे की चोरी के आरोपों पर तीखा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद पीड़ादायक है कि प्रभु श्रीराम का मंदिर बने अभी गिने-चुने दिन ही हुए हैं और अभी से इस तरह के विवाद और वित्तीय अनियमितताओं के विषय सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वे इसीलिए देश में ‘सनातन बोर्ड’ बनाने की वकालत करते थे। सरकारी अधिकारियों को मंदिर का सर्वेसर्वा बनाना कतई ठीक नहीं है। अधिकारियों की व्यवस्था हमारे धर्म से संबंधित नहीं है। किसी अन्य धर्म के प्रार्थना स्थलों पर तो सरकारी अधिकारियों का हस्तक्षेप नहीं होता, फिर हमारे ही धर्म में ऐसा क्यों? हम तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से यही प्रार्थना करेंगे कि वे अयोध्या के राम मंदिर से ही ‘सनातन बोर्ड’ बनाने की ऐतिहासिक शुरुआत करें। देश के चारों शंकराचार्यों में से जो भी उन्हें प्रिय हों, उन्हें इस बोर्ड का अध्यक्ष बनाएं और मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह सनातनियों के हाथों में सौंपें।” कथावाचक ने शास्त्रों की चेतावनी दोहराते हुए कहा कि जो कोई भी मंदिर के पवित्र धन को खाने (भ्रष्टाचार करने) की कोशिश करता है, वह धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अगले जन्मों में 60 हजार साल तक मल का कीड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि जिसे इस बात का ज्ञान होगा, वह मंदिर का एक रुपया भी हाथ नहीं लगाएगा।
एक्शन में SIT; नृपेंद्र मिश्र बोले— ‘लापरवाही नहीं होगी, आपराधिक एंगल की भी होगी जांच’
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। सोमवार को इस टीम ने मंदिर परिसर और ट्रस्ट के कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल की। इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने जांच को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस जांच में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा, “एसआईटी जांच के दो मुख्य पहलू हैं— पहला आपराधिक और दूसरा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थागत सुधार। जब दोनों पहलुओं पर निष्पक्ष काम होगा, तभी हम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत कर पाएंगे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट जांच में एसआईटी को हर संभव सहायता उपलब्ध करा रहा है।”
अखिलेश यादव ने खोला था मोर्चा, अयोध्या की सड़कों पर लगे ‘नरक’ वाले बैनर
इस पूरे विवाद की पटकथा 7 जून को उस समय लिखी गई थी, जब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपये गायब होने की रिपोर्टों का हवाला देते हुए सीधे अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। हालांकि, उस समय मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि आंतरिक ऑडिट जारी है और गबन के कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं। अब इस विवाद के बीच राजनीति और पोस्टर वॉर भी शुरू हो गया है। युवा कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी शरद शुक्ला ने अयोध्या में एक बड़ा विवादित बैनर लगा दिया है। स्कंद पुराण के श्लोक वाले इस बैनर पर लिखा गया है कि जो भी राम मंदिर की संपत्ति या धन की चोरी करने का प्रयास करेगा, वह 60,000 वर्षों तक कीड़े के रूप में नरक में सड़ेगा और भगवान रामलला स्वयं उसका न्याय करेंगे। फिलहाल, एसआईटी की एंट्री के बाद अयोध्या का सियासी और धार्मिक पारा पूरी तरह चढ़ चुका है।