सीवर जाम से वायरल वीडियो तक, यूपी में ‘मैन्युफैक्चर्ड आउटरेज’ पर सवाल

KNEWS DESK- लोकतंत्र में असहमति जताना सभी का अधिकार है, लेकिन सच और झूठ के बीच का फर्क मिटाकर सत्ता को बदनाम करना खतरनाक संकेत है। उत्तर प्रदेश में हाल की कुछ घटनाओं को लेकर ऐसा ही सवाल उठ रहा है। वाराणसी के कई इलाकों में सीवर सफाई के दौरान बालू-सीमेंट की बोरियां, लकड़ी, पत्थर और प्लास्टिक मिलने के बाद प्रशासन ने साजिश की आशंका जताई और प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बावजूद विपक्ष ने जांच पूरी होने से पहले सरकार पर हमला शुरू कर दिया।

दूसरी घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी है, जहां एक युवती के सवाल पूछने का वीडियो तेजी से वायरल हुआ। लेख में आरोप लगाया गया है कि इसे सरकार विरोधी नैरेटिव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। लेखक ने युवती की पहचान, वीडियो के तेजी से प्रसार और विपक्षी प्रतिक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं।

सोशल मीडिया पर छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर ‘मैन्युफैक्चर्ड आउटरेज’ खड़ा किया जा रहा है। लेखक का कहना है कि विरोध और दुष्प्रचार में अंतर होना चाहिए। राजनीतिक दलों को बिना जांचे-परखे किसी घटना को मुद्दा बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।