RTE के माध्यम से शुरू हुए एडमिशन.. लेकिन पिछले साल के 1700 बच्चे अपने प्रवेश का कर रहे इंतजार   

गाजियाबाद, हमारी सरकारे और सिस्टम का कहना है कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे को है, इसी आदर्श के साथ हर साल राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत जरूरतमंद बच्चों निजी स्कूलों में एडमिशन लिए जाते हैं। इस बार छह फरवरी से स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले चरण में 28 फरवरी तक फॉर्म भरे जा सकेंगे। इस बार एडमिशन के लिए जरूरतमंद अभिभावकों का साथ देने के लिए पैरंट्स असोसिएशन भी खूब-बढ़ चढ़कर काम कर रही है। पैरंट्स असोसिएशन का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी के चलते कई बच्चे एडमिशन कराने में पीछे रह जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा न हो इसलिए शुरू से ही असोसिएशन की टीमें जगह-जगह पर काम कर रही हैं। फॉर्म भरने में मदद कर रही हैं। वहीं अगर हम पिछले साल के एडमिशन की बात करें तो 1700 बच्चों का लिस्ट में नाम होते हुए भी अभी तक एडमिशन नहीं मिला है।

साल 2022 फरवरी में 5067 विद्यार्थियों का सूची में नाम शामिल किया गया था। इसमें 3206 छात्रों को निजी स्कूलों ने एडमिशन दे दिया। हालांकि इस प्रक्रिया के लिए भी प्रशासन को करीब 50 निजी स्कूलों में नोटिस देना पड़ा था। इसमें लेटर प्रक्रिया के बाद करीब 1700 विद्यार्थी एडमिशन से वंचित रह गए थे। स्कूलों की इस मनमानी को देखते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार करके जिलाधिकारी को सौंपी। इसमें जिलाधिकारी की ओर से 8 स्कूलों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। आदेश के मुताबिक, सीबीएसई को लेटर भी भेजे गए, लेकिन फिर कागज़ी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई। मान्यता रद्द करने की बातें हवाहवाई हो गईं। फिर एक बार जरूरतमंदों के आगे निजी स्कूलों की मनमानी के हौंसला बढ़ गए।

 

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