उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट – उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पक्ष विपक्ष आमने सामने है। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को गिनाता नज़र आ रहा है, वहीं विपक्ष लगातार कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता नज़र आ रहा है। इस क्रम में विपक्ष ने इस बार प्रदेश की जमीनों से जुड़े विषय को मुद्दा बनाया है। दरअसल, उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश को नई दिशा देने के लिए गठित उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) की कार्यप्रणाली, लैंड बैंक और 7,000 बीघा जमीन निजी हाथों में सौंपने के आरोपों को लेकर इन दिनों सियासत गरमाई हुई है। एक ओर सरकार बनाये गये इस प्राधिकरण को विकास व निवेश के लिए महत्वपूर्ण मान रही है, वही विपक्ष प्राधिकरण को लेकर सरकार पर कई सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष का आरोप है, कि सरकार ने UAIIDB के नाम पर एक ऐसा सिस्टम बनाया है. जो देवभूमि को कॉर्पोरेट का ठिकाना बना रहा है। इसके साथ ही उद्यान, पोटैटो प्रोजेक्ट, ब्रीडिंग गार्डन की हजारों बीघा जमीन को चिन्हित कर लैंड बैंक बनाया गया और अब उसे 90 साल की लीज पर फाइव-स्टार होटल और रिसॉर्ट के लिए दिया जा रहा है। विपक्ष का सवाल है, कि जब पहाड़ी के लिए 250 वर्ग मीटर की सीमा है, तो बाहरी कॉर्पोरेट के लिए 7000 बीघा क्यों दिया जा रहा है। विपक्ष इसे दोहरा मापदंड बता रहा है, एक तरफ सरकार सख्त भू-कानून की बात करती है, दूसरी तरफ कृषि भूमि के सर्किल रेट पर व्यावसायिक जमीन देकर खजाने को नुकसान पहुंचा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सब-लीज और बंधक की छूट देकर ये जमीन भविष्य में फ्री-होल्ड में बदल जाएगी। हालांकि, इस पूरे मामले में शासन ने भी अपना पक्ष रखा है। वहीं सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष पर दुष्प्रचार का आरोप लगाया है, सत्ता पक्ष का तर्क है कि ये जमीन बेची नहीं जा रही, बल्कि मोनेटाइज की जा रही है, इससे निवेश आएगा, रोजगार बढ़ेगा और राज्य की GSDP दोगुनी होगी। लेकिन विपक्ष लगातार सरकार पर UAIIDB को मनमानी पावर देने का आरोप लगा रहा है। जिसके चलते आपसी बयानबाजी तेज़ हो गई है।
चुनावों से पहले उत्तराखंड में सरकारी जमीनों के बेचे जाने की सियासत तुल पकड़ने लगी है। सरकारी जमीनों पर हो रही सियासत के बीच कांग्रेस भाजपा में आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बनाने का काम किया है। जबकि सरकार इसको कांग्रेस पर ही आरोप लगाने का काम कर रही ही।इस बीच शासन की तरफ से भी इस विषय पर प्रमुख सचिव ने पूरी सफाई दी है। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है आरोपों के बीच सरकार की भी चिंता बढ़ने लगी है।वही चार्जशीट कमेटी की पत्रकार वार्ता में करन माहरा ने कहा कि ये लड़ाई कानून और गैर-कानून की है। राज्य में कानून है कि अगर 12.50 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन लीज या बिक्री करनी है तो कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी, लेकिन सरकार ने कैबिनेट से प्रस्ताव लाकर UAIIDB को अतिरिक्त पावर दे दी कि वो जो चाहे कर ले।वही मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष के सवालों पर तंज कसते हुए इसे निराधार बताया है. ऐसे में देखना होगा कि सरकार कैसे इस विषय को कंट्रोल करती है।
कुल मिलकर विपक्ष का मानना है.12.50 एकड़ के कानून को बायपास कर UAIIDB को मनमानी पावर दे दी और 244 करोड़ की जमीन 37 लाख में बेच दी। अगर कांग्रेस की सरकार आई तो जमीन वापस लेंगे।वही धामी सरकार ये पंजाब-गुजरात मॉडल पर निवेश और रोजगार के लिए बनी संस्था बताते हुए,13 हजार एकड़ जमीन अतिक्रमण से खाली करने,साथ ही बेचने के आरोप को निराधार बता रही है। और सचिव फैक्ट के अनुसार 7000 बीघा नहीं, सिर्फ 45 एकड़ मिली है, ऋषिकेश जैसी प्राइम प्रॉपर्टी को लीज पर देकर सरकार 60 साल में 4600 करोड़ कमाएगी, 92% पैसा सीधे खजाने में जाएगा।अब सवाल जनता का है.क्या ये वाकई में एसेट मोनेटाइजेशन है जिससे उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन और इन्वेस्टमेंट हब बनेगा, या सरकारी खजाने की जमीनों को प्राइवेट हाथों में देने का खेल तो नहीं जिस पर जमीन पर जमीनी राजनीति तेजी से जारी है.