उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. प्रदेशभर में मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां जमा करने का काम तेजी से चल रहा है. निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक प्रदेश में करीब 70 हजार आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं. इसके साथ ही नए मतदाताओं के आवेदन भी बड़ी संख्या में मिले हैं. एस आई आर के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6, नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 और संशोधन के लिए फॉर्म 8 के जरिए आवेदन लिए जा रहे हैं. वहीं दावे और आपत्तियां भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा की जा रही हैं. सबसे ज्यादा आपत्तियां प्रदेश के मैदानी जिलों से सामने आई हैं. खासकर प्रदेश की ऊधमसिंह नगर जिले की जसपुर और काशीपुर विधानसभा सीटों पर आपत्तियों की भरमार है. निर्वाचन विभाग ने साफ किया है कि एक व्यक्ति के नाम से पांच से ज्यादा आपत्तियां आने पर उनकी विशेष जांच कराई जाएगी, ताकि सूची में किसी तरह की गड़बड़ी न हो पाये. निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियां जमा कराने की आखिरी तारीख 13 अगस्त तय की गई थी. इसके बाद कोई नया दावा या आपत्ति स्वीकार नहीं किया जाएगा.वही बड़ी संख्या में आपत्तियां आने से सियासत भी गरमा गई है. विपक्ष का आरोप है, कि सत्ता पक्ष अपने फायदे के लिए फर्जी आपत्तियां लगवाकर वोटर लिस्ट से नाम कटवाने की कोशिश कर रहा है. तो दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि एसआईआर का मकसद सिर्फ फर्जी नाम हटाकर साफ सुथरी मतदाता सूची बनाना है, ताकि चुनाव में कोई गड़बड़ी न हो. बरहाल यह तो फाइनल लिस्ट आने पर ही ज्ञात हो पायेगा कि कितने नाम कटते और जुड़ते है। साथ ही चुनावी समीकरण को कितना प्रभावित करेंगे लेकिन इस सबके चलते राजनीतिक गलियारों में आपसी बहस भी देखी जा रही है
उत्तराखंड राज्य में चल रहे एसआईआर के दूसरे चरण की प्रक्रिया 13 अगस्त को संपन्न हो गई है. एसआईआर के दूसरे चरण के तहत 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच कुल 2 लाख 83 हजार 890 दावे एवं आपत्तियां तमाम माध्यमों से प्राप्त हुई हैं. जिसमें फॉर्म- 6 के 1.28 लाख, फार्म- 7 के 1.07 लाख और फार्म- 8 के 47 हज़ार आवेदन प्राप्त हुए है. ऐसे में अब 14 अगस्त से एसआईआर के तीसरे चरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है.जिस पर प्रदेश के कई जिलों से नाम काटने उम्र का सही विवरण, स्थानीय पता आदि सम्मिलित है. जिसको लेकर राजनैतिक प्रतिक्रिया के साथ आरोप प्रत्यारोप से राजनीति भी चुनाव आने से पहले बेहद गरमा गई है.
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया ने सियासत को नई धार दे दी है. एक तरफ निर्वाचन आयोग साफ सुथरी मतदाता सूची बनाने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष को डर है कि कहीं बड़े पैमाने पर नाम न कट जाएं. मैदानी जिलों से आ रही हजारों आपत्तियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले चुनाव में वोटर लिस्ट ही सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है. 13 अगस्त के बाद दावे और आपत्तियों पर सुनवाई शुरू हो गई है, उस दौरान तय होगा कि कितने नए नाम जुड़ते हैं और कितनों के नाम सूची से हटते हैं. निर्वाचन विभाग का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और किसी पात्र मतदाता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. अब देखना होगा कि एसआईआर के बाद बनने वाली नई मतदाता सूची उत्तराखंड की राजनीति की दिशा कितनी बदलती है. फिलहाल सभी दलों की नजर आयोग की हर कार्रवाई पर टिकी है।