KNEWS DESK- मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित हो गया। विधेयक को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने बिल का विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की, जबकि सरकार ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया। भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विधेयक पारित होने की घोषणा की।
मध्य प्रदेश अब उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों ने भी UCC को लेकर पहल की थी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए पारिवारिक और सामाजिक मामलों में समान नियम लागू करना है।
विपक्ष ने किया विरोध, सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग
मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकार ने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक पेश किया। बिल पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने मांग की कि विधेयक को विस्तार से जांच के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि इतने बड़े कानून पर व्यापक चर्चा और विशेषज्ञों की राय जरूरी है। हालांकि, सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और बिल पर चर्चा जारी रखी।
हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी की। कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गिनाए फायदे
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC विधेयक को राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने से समाज में भेदभाव कम होगा और सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था स्थापित होगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल इस मुद्दे पर दोहरी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार दिया गया है और UCC इसी भावना को आगे बढ़ाने का काम करेगा। सीएम ने कहा कि आज विधानसभा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा है। उनके अनुसार, सभी नागरिकों के लिए समान नियम होने से महिलाओं को विशेष रूप से लाभ मिलेगा और पारिवारिक कानूनों में एकरूपता आएगी।
सदन में लगे नारे
विधेयक पारित होने के दौरान विधानसभा में भारी नारेबाजी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के विधायकों ने UCC के समर्थन में नारे लगाए, जबकि विपक्ष ने सरकार के फैसले का विरोध किया। हंगामे के बीच सदन में “जय श्री राम” समेत कई राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। विपक्ष लगातार बिल का विरोध करता रहा, वहीं सरकार ने इसे सामाजिक समानता और न्याय से जुड़ा कदम बताया।
UCC लागू होने के बाद संभावित बदलाव
समान नागरिक संहिता के तहत राज्य में कई पारिवारिक कानूनों में बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे विषय शामिल हैं।
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। बिना पंजीकरण के लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कानून के तहत अपराध माना जा सकता है।
- लिव-इन संबंध खत्म करने की स्थिति में संबंधित प्रक्रिया का पालन करना होगा और रजिस्ट्रार को जानकारी देनी होगी।
- आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है।
- कानूनी तलाक के बिना एक से अधिक विवाह करने पर रोक लगाई जाएगी।
- संपत्ति और विरासत के मामलों में बेटियों को बेटों के समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
- शादी, तलाक और गुजारा भत्ता जैसे मामलों में सभी समुदायों के लिए समान नियम लागू होंगे।
- बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को सभी नागरिकों के लिए एक समान और पारदर्शी बनाने का प्रावधान है।
- माता-पिता और बच्चों से जुड़े संपत्ति अधिकारों तथा बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल से जुड़े नियमों को भी मजबूत किया जाएगा।
सरकार इसे समानता और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसके प्रावधानों और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। अब इस कानून के लागू होने के बाद इसके प्रभाव और व्यावहारिक बदलावों पर नजर रहेगी।