डिजिटल डेस्क- देवास जिले के एबी रोड स्थित टोंककला गांव में गुरुवार सुबह एक संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूँज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और आसपास के मकानों की दीवारें ढह गईं। इस हृदयविदारक हादसे में फिलहाल दो मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि मलबे में दबे और झुलसे लोगों को मिलाकर मृतकों का आँकड़ा 15 के पार पहुँच सकता है। धमाके के बाद का दृश्य किसी युद्ध क्षेत्र जैसा भयावह था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विस्फोट इतना तीव्र था कि फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों के शरीर के चिथड़े उड़कर दूर सड़क पर जा गिरे। चारों ओर चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, फैक्ट्री परिसर में सुबह भारी मात्रा में खुला बारूद पड़ा देखा गया था, जो संभवतः इस विनाशकारी आग और विस्फोट का मुख्य कारण बना। घटना के तुरंत बाद आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया, जिसे देख ग्रामीण जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
राहत कार्य और अस्पताल में मची अफरा-तफरी
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और दमकल की दर्जनों गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। सुबह करीब 11:25 बजे से ही घायलों का जिला अस्पताल पहुँचना शुरू हो गया था। डॉक्टरों की टीम घायलों को बचाने में जुटी है, जिनमें से कई की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने अभी तक धमाके के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जाँच टीमें मौके से साक्ष्य जुटा रही हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश: राजनीतिक संरक्षण के आरोप
इस भीषण त्रासदी ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय द्वारा सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही थीं। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार अवैध रूप से बारूद भंडारण की शिकायत की थी, लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव में यह चर्चा भी तेज है कि इस फैक्ट्री को स्थानीय सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी या उनके करीबियों का संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते जिम्मेदार विभाग आँखें मूंदे रहे।