डिजिटल डेस्क- मध्यप्रदेश के जबलपुर में अब स्कूली बच्चों को अपनी क्षमता से अधिक वजन ढोने की जरूरत नहीं होगी। मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के कड़े निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने ‘नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी’ को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को लिखे पत्र में आयोग ने स्पष्ट किया है कि भारी बस्ते बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन चुके हैं, जिससे अब और समझौता नहीं किया जाएगा।
कक्षा के अनुसार तय हुआ वजन का पैमाना
प्रशासन ने बच्चों की उम्र और उनकी कक्षा के आधार पर स्कूल बैग के वजन की एक विस्तृत सूची जारी की है। इस नई नीति की सबसे खास बात यह है कि प्री-प्राइमरी यानी केजी और नर्सरी के बच्चों के लिए बैग की कोई आवश्यकता नहीं बताई गई है। अन्य कक्षाओं के लिए मानक इस प्रकार हैं:
- कक्षा 1: अधिकतम 1078 ग्राम
- कक्षा 2: अधिकतम 1080 ग्राम
- कक्षा 3 से 5: 1572 ग्राम से 1916 ग्राम तक
- कक्षा 6 से 8: 3080 ग्राम से 3640 ग्राम तक
- कक्षा 9 और 10: 4400 ग्राम से 4182 ग्राम तक
- कक्षा 11 और 12: 3.5 किलो से 5 किलो तक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
विशेषज्ञों और बाल संरक्षण आयोग का मानना है कि अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक वजन उठाने के कारण छोटे बच्चों की रीढ़ की हड्डी और कंधों पर गहरा असर पड़ता है। भारी बस्तों के कारण बच्चों का शारीरिक विकास रुक सकता है और वे कम उम्र में ही पीठ दर्द, सर्वाइकल और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों को किताबों की संख्या संतुलित रखने और गैर-जरूरी सामग्री स्कूल न मंगवाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर गिरेगी गाज
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के नेतृत्व में टीमें स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी। इस दौरान मौके पर ही छात्रों के बैग का वजन तौला जाएगा। यदि किसी भी स्कूल में निर्धारित मानक से अधिक वजन पाया गया, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें न केवल भारी जुर्माना शामिल है, बल्कि बार-बार नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।