KNEWS DESK- मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। भाजपा द्वारा अब तक दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारे जाने के बावजूद तीसरी सीट को लेकर चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी संगठन जहां तीसरे उम्मीदवार की संभावना से इनकार कर रहा है, वहीं मुख्यमंत्री के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि पार्टी की ओर से चार नामांकन फॉर्म लिए जाने और विधायकों को भोपाल में रुकने के निर्देश दिए जाने के बाद तीसरी सीट पर दांव खेलने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी फिलहाल केवल दो सीटों की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है और तीसरे उम्मीदवार को उतारने को लेकर न तो कोई निर्णय हुआ है और न ही कोई विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने कांग्रेस को भी आश्वस्त करते हुए कहा कि उसके पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, इसलिए उसे किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
इसके बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक बयान ने राजनीतिक माहौल को फिर गर्म कर दिया। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी।” मुख्यमंत्री के इस संक्षिप्त लेकिन संकेतपूर्ण जवाब ने भाजपा की रणनीति को लेकर कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
विधानसभा के वर्तमान गणित पर नजर डालें तो 228 विधायक मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक मौजूद हैं। गणित के अनुसार भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि कांग्रेस में संभावित क्रॉस वोटिंग और भाजपा की रणनीतिक चालों को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अभी अपने सभी विकल्प खुले रखे हुए है। पार्टी अंतिम समय तक परिस्थितियों का आकलन कर सकती है और जरूरत पड़ने पर कोई बड़ा फैसला भी ले सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पार्टी अब भी दो सीटों पर ही फोकस करने की बात कह रही है।
अब सबकी निगाहें 8 जून की नामांकन प्रक्रिया और भाजपा के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। राज्यसभा की दो सीटों का चुनाव भले ही लगभग तय माना जा रहा हो, लेकिन तीसरी सीट को लेकर बना रहस्य फिलहाल मध्यप्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बना हुआ है।