मेरठ के कारोबारी का अपहरण, आगरा में 2 करोड़ की फिरौती और कुएं में कैद जिंदगी, 78 घंटे बाद ऐसे बची जान

2013 में मेरठ के सरधना में हुए हाईप्रोफाइल अपहरण कांड की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। कारोबारी का अपहरण कर 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। पुलिस और साइबर एक्सपर्ट की रणनीति से बदमाशों तक पहुंचने और खेत में बने कुएं की गुप्त खोह से कारोबारी को सुरक्षित निकालने की यह कहानी अब वेब सीरीज ‘प्रीतम और पेड्रो’ को लेकर सुर्खियों में है।

Knews Desk – उत्तर प्रदेश के मेरठ में साल 2013 में हुए एक हाईप्रोफाइल अपहरण कांड की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। अगस्त 2013 में सरधना के एक प्रतिष्ठित कारोबारी का अपहरण कर लिया गया था। इस वारदात के बाद मेरठ से लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। स्थानीय पुलिस के साथ यूपी एसटीएफ भी कारोबारी की तलाश में जुट गई थी, लेकिन बदमाशों का सुराग नहीं मिल रहा था। इसी बीच बदमाशों ने कारोबारी के ही मोबाइल नंबर से उनके परिवार को फोन कर 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी।

इस मामले पर निर्माता-निर्देशक राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज ‘प्रीतम और पेड्रो’ आने के बाद पुराना कांड फिर सुर्खियों में आ गया है। इसमें अरशद वारसी और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिकाओं में हैं। बताया गया है कि सीरीज में इस वारदात की कहानी का एक हिस्सा दिखाया गया है, जबकि असल घटना में कई ऐसे मोड़ आए थे, जिन्होंने पुलिस की जांच को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर तय हुई फिरौती की जगह

बदमाशों ने फिरौती की रकम लेने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जगह तय की थी। उनकी शर्त थी कि कारोबारी की पत्नी अकेले पूरी रकम लेकर आएं। उस समय एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वजह से तय स्थान तक पहुंचना आसान नहीं था। पुलिस को बदमाशों तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिल रहा था। ऐसे में पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे की मदद ली।

बदमाशों की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही थी और पुलिस के पास समय भी कम था। ऐसे में फिरौती की रकम देने की रणनीति बनाई गई। कारोबारी की पत्नी रकम लेकर यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा पहुंचीं और फिर बताए गए स्थान की ओर रवाना हुईं। इसी दौरान साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने फिरौती के बैग में एक मोबाइल फोन साइलेंट मोड पर छिपा दिया, जिसका जीपीएस चालू था। पुलिस इस फोन की लोकेशन के आधार पर बदमाशों का पीछा करने लगी।

500 कमरों वाले हॉस्टल में ऐसे पकड़े गए बदमाश

बदमाशों ने कारोबारी की पत्नी से बैग ले लिया, लेकिन उन्हें शक हो गया और वे भागने लगे। पुलिस उनका पीछा करते हुए आगरा के एक हॉस्टल तक पहुंची। बदमाश 500 से अधिक कमरों वाले चार मंजिला हॉस्टल में घुस गए। इतने बड़े परिसर में उनकी तलाश करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया।

ऐसे में अमित दुबे ने बैग में छिपाए गए मोबाइल पर कॉल किया और पुलिसकर्मियों को हर कमरे का दरवाजा खटखटाने तथा शोर मचाने की रणनीति अपनाने को कहा। इस प्रक्रिया में पुलिस बदमाशों तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, मुठभेड़ में दोनों बदमाश मारे गए।

गांव के प्रधान की पगड़ी में छिपा था अहम सुराग

इसके बाद पुलिस ने मारे गए बदमाशों के मोबाइल नंबरों की जांच की। जांच में मेरठ के एक व्यक्ति से उनकी लगातार बातचीत होने का पता चला। पुलिस संबंधित गांव पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। गांव का प्रधान पुलिस को वहां से जाने के लिए कहने लगा और उसे गांव की सीमा तक छोड़ने भी आया।

इसी दौरान साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे को संदेह हुआ कि जिस मोबाइल नंबर की तलाश की जा रही थी, उसकी लोकेशन पुलिस के साथ-साथ चल रही है। इसके बाद गांव के प्रधान को पकड़कर पूछताछ की गई। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान ने संबंधित मोबाइल फोन को वाइब्रेशन मोड पर रखकर अपनी पगड़ी में छिपा रखा था। इससे पुलिस को अपहरण की साजिश के कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद मिली।

पूछताछ के बाद गांव के प्रधान ने वारदात कबूल की और पुलिस को उस स्थान तक ले गया, जहां कारोबारी को छिपाकर रखा गया था। यह जगह खेतों के बीच स्थित एक कुआं था। कुएं के अंदर एक खोह बनी थी और उसके भीतर भी एक दूसरी खोह थी। कारोबारी को इसी गुप्त स्थान पर रखा गया था।

पुलिस ने करीब 78 घंटे बाद कारोबारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अपहरण, फिरौती, हॉस्टल में बदमाशों की तलाश और कुएं की गुप्त खोह से कारोबारी के रेस्क्यू की यह पूरी घटना एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रही है।

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