डिजिटल डेस्क- देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आधिकारिक घोषणा करते हुए आगामी सोमवार से दिल्ली के सरकारी दफ्तरों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने का निर्देश दिया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम होगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल की भारी बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। दिल्ली में अक्सर सोमवार के दिन दफ्तरों के खुलने और लोगों के सप्ताहांत (वीकेंड) के बाद लौटने के कारण सड़कों पर भीषण ट्रैफिक जाम देखने को मिलता है। मुख्यमंत्री ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए ‘मंडे वर्क फ्रॉम होम’ की नीति पेश की है। सरकार के इस फैसले से हजारों कर्मचारी अब सोमवार को घर से ही अपना सरकारी कामकाज निपटा सकेंगे। निजी संस्थानों से भी अपील की गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार इस मॉडल को अपनाएं ताकि दिल्ली की हवा और सड़कों को कुछ राहत मिल सके।
मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे निजी वाहनों के बजाय दिल्ली मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें। सरकार का तर्क है कि यदि लोग सप्ताह में कम से कम एक दिन भी घर से काम करते हैं और बाकी दिनों में मेट्रो का सहारा लेते हैं, तो इससे शहर के कार्बन फुटप्रिंट में बड़ी कमी आएगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सोमवार और मंगलवार को फेरे बढ़ाएं ताकि लोगों को असुविधा न हो।
पेट्रोल-डीजल की बचत और आर्थिक लाभ
इस फैसले के पीछे का एक मुख्य कारण ईंधन की बचत भी है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए रोजाना दफ्तर जाना आर्थिक रूप से भी बोझिल होता जा रहा है। सरकार का आकलन है कि एक दिन के ‘वर्क फ्रॉम होम’ से पूरी दिल्ली में लाखों लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत होगी, जो न केवल व्यक्ति की जेब के लिए अच्छा है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भी जरूरी है।
प्रदूषण के खिलाफ ‘वॉरुम’ मोड में सरकार
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर साल भर चिंता का विषय बना रहता है। ‘वर्क फ्रॉम होम’ की इस पहल को प्रदूषण के खिलाफ एक ‘लॉन्ग टर्म’ रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के इस दौर में जब अधिकांश काम ऑनलाइन संभव हैं, तो हर कर्मचारी का रोजाना दफ्तर आना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। इस कदम से ऑफिस के रखरखाव, बिजली की खपत और अन्य संसाधनों में भी बचत होगी।