KNEWS DESK– दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने परिसंपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। DMRC को मुंबई मेट्रो लाइन-3 के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए ISO 55001:2024 प्रमाणन मिला है। इसके साथ ही DMRC भारत का पहला मेट्रो संगठन बन गया है, जिसे परिसंपत्ति प्रबंधन के इस नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानक के लिए प्रमाणित किया गया है।
DMRC के मुताबिक, यह उपलब्धि सिर्फ एक प्रमाणपत्र हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह मेट्रो परिसंपत्तियों के प्रबंधन में पारंपरिक रखरखाव व्यवस्था से आगे बढ़कर रणनीतिक, जोखिम आधारित और पूरे जीवन-चक्र पर केंद्रित प्रबंधन प्रणाली अपनाने को दर्शाती है।
क्या है ISO 55001:2024?
ISO 55001:2024 मानक किसी संगठन की संपत्तियों के रखरखाव तक सीमित नहीं रहता। इसमें परिसंपत्तियों के प्रदर्शन, जोखिम, लागत और पूरे जीवन-चक्र को संगठन के व्यापक लक्ष्यों से जोड़कर देखा जाता है। इसका उद्देश्य संपत्तियों की विश्वसनीयता बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और लंबे समय तक सुरक्षित व प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना है।
DMRC ने यह प्रमाणन हासिल करने के लिए अपने Strategic Asset Management Plan को मजबूत किया। इसके अलावा परिसंपत्ति प्रबंधन के लक्ष्यों को संगठन की प्राथमिकताओं से जोड़ा गया और जोखिम आकलन तथा जीवन-चक्र नियंत्रण व्यवस्था को बेहतर किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
रिकॉर्ड समय में मिला प्रमाणन
DMRC का कहना है कि उसने यह प्रमाणन रिकॉर्ड समय में हासिल किया है। परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था की लगातार निगरानी के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs), ऑडिट और नियमित प्रबंधन समीक्षा का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मेट्रो की महत्वपूर्ण संपत्तियों के प्रदर्शन और विश्वसनीयता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
मुंबई मेट्रो लाइन-3 की जिम्मेदारी
DMRC मुंबई मेट्रो लाइन-3 के 33.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहा है। यह कॉरिडोर कोलाबा, बांद्रा और SEEPZ को जोड़ता है। इसके तहत रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन, स्टेशन, लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रैक और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है।
ISO 55001:2024 प्रमाणन के जरिए DMRC ने सुरक्षा, विश्वसनीयता, दक्षता और स्थायित्व को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत किया है। यह उपलब्धि भारत के शहरी रेल क्षेत्र में वैज्ञानिक और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए नया मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।