बिहारः विक्रमशिला सेतु बंद होने से यातायात व्यवस्था ध्वस्त, इन रास्तों से होकर ही पहुंच पाएंगे अपनी मंजिल

डिजिटल डेस्क- बिहार की जीवनरेखा माना जाने वाला भागलपुर का विक्रमशिला सेतु एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह सुखद नहीं है। पुल के पिलर संख्या के पास सड़क धंसने और तकनीकी खराबी आने के कारण इस पर परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है। इस घटना ने न केवल भागलपुर बल्कि पूरे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच के सड़क संपर्क को छिन्न-भिन्न कर दिया है। जानकारी के अनुसार, सोमवार की सुबह पुल के एक हिस्से में अचानक दरार और सड़क धंसने की शिकायत मिली। भारी वाहनों के दबाव और पुल के पुराने ढांचे के कारण स्थिति गंभीर हो गई। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत प्रभाव से पुल पर छोटी और बड़ी सभी गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। विक्रमशिला सेतु, जो गंगा नदी पर बना है, भागलपुर को नवगछिया, पूर्णिया, और कटिहार जैसे उत्तर बिहार के जिलों से जोड़ता है।

ट्रैफिक डाइवर्जन: अब मुंगेर का सहारा

विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बंद होने का सीधा असर नेशनल हाईवे (NH-80) और NH-31 पर देखने को मिल रहा है, जहाँ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में वैकल्पिक मार्ग जारी किया है, जिसके तहत भागलपुर से उत्तर बिहार की ओर जाने वाले सभी वाहनों को अब मुंगेर के श्रीकृष्ण सेतु की ओर डाइवर्ट किया जा रहा है। हालांकि, इस डाइवर्जन के कारण यात्रियों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ गई हैं, क्योंकि मुंगेर होकर जाने से उन्हें लगभग 60 से 80 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों का भारी नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही, मुंगेर मार्ग पर अचानक गाड़ियों का दबाव बढ़ने से वहां भी भीषण जाम की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे पूरा यातायात तंत्र चरमरा गया है।

यात्रियों की बढ़ी मुसीबतें

पुल बंद होने का सबसे बुरा असर एम्बुलेंस सेवाओं और दैनिक यात्रियों पर पड़ा है। भागलपुर के सिल्क सिटी होने के नाते यहाँ से व्यापारिक माल की ढुलाई भी बड़े पैमाने पर होती है। ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि वे घंटों से फंसे हुए हैं और मुंगेर का रास्ता काफी घुमावदार और लंबा है। पथ निर्माण विभाग के इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि पुल की सेहत की जांच की जा रही है। जब तक पिलर और धंसी हुई सड़क की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक भारी वाहनों को अनुमति देना जोखिम भरा होगा। फिलहाल, एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है कि क्या छोटे वाहनों को एक लेन से निकाला जा सकता है या नहीं।

बार-बार उठते सवाल

विक्रमशिला सेतु पर दबाव कम करने के लिए इसके बगल में एक नए पुल का निर्माण भी चल रहा है, लेकिन पुराने पुल की जर्जर हालत अक्सर प्रशासन के दावों की पोल खोल देती है। स्थानीय लोगों में सरकार और विभाग के प्रति भारी आक्रोश है, क्योंकि यह पुल इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

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