हवा में होते हादसे,चार धाम के रस्ते ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु देवभूमि के चारों धामों के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। इस वर्ष अब तक करीब 60 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार सड़क और हवाई मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। वहीं सरकार की ओर से भी यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर लगातार बेहतर व्यवस्थाओं के दावे किए जाते रहे हैं।हालही में मुख्यमंत्री धामी ने चार धाम से संबंधित सडको का जमीनी स्तर पर ज्याजा भी किया लेकिन बीते रोज चमोली जिले में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने हवाई सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। दरअसल, प्रदेश के जोशीमठ क्षेत्र में बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा एक निजी कंपनी का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाया गया,जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख जताते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस घटना के बाद प्रदेश की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। बद्रीनाथ केदारनाथ महापंचायत सहित विपक्ष ने भी हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर सरकार से सवाल पूछे हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा के बीच हेली सेवाओं की सुरक्षा, निगरानी और ख़राब सड़को की बदहाली पर जवाबदेही को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने नजर आ रहे हैं।

प्रदेश में अंतिम चरण में चल रही चारधाम यात्रा के बीच बीते रोज़ चमोली जिले में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाला ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर जोशीमठ क्षेत्र के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई, मृतकों में पांच यात्री कर्नाटक के बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुख जताते हुए हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद संबंधित हेलीकॉप्टर कंपनी की सेवाओं को रोककर सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है। दूसरी ओर इस हादसे ने प्रदेश की राजनीति में भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने हेली सेवाओं की सुरक्षा, उड़ानों की निगरानी और यात्रियों की जान की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। विपक्ष का कहना है कि केवल हादसे के बाद जांच के आदेश देना पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। फिलहाल हादसे की असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इस बीच हेली सेवाओं की सुरक्षा पर सियासी बहस जरूर तेज हो गई है।

देवभूमि उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ हादसे की वजह जानने का नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का भी है। जिससे पता चल सके कि आखिर हेली सेवाओं के संचालन में सुरक्षा मानकों का कितना पालन हो रहा है। और उड़ानों की निगरानी और कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है। सरकार ने जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन विपक्ष चाहता है कि जांच के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय हो। अब देखना होगा कि हादसे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकार भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है। क्योंकि चारधाम यात्रा आस्था का मार्ग जरूर है, लेकिन इस मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा से भी कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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