उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर गैरसैंण चर्चा के केंद्र में रहा, जब चमोली जिले के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित दो दिवसीय अनुपूरक बजट सत्र आहूत किया गया, जिसे कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक ओर गैरसैंण में एक ही साल के भीतर दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित हुआ, जिसको भराड़ीसैण में विधानसभा भवन का निर्माण से अब तक के समय में पहली बार किये जाने को ऐतिहासिक रुप में देखा जा रहा हैं। तो दूसरी ओर सदन में 7844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित किया गया। गैरसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसके बाद समय समय पर यहां सदन की कार्यवाही आयोजित होती रही। लेकिन इस साल मार्च में बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दोबारा विधानसभा की कार्यवाही होना गैरसैंण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उधर, सत्र के पहले दिन विधानसभा के बाहर विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, तो सदन के भीतर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार अनुपूरक बजट को विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने का माध्यम बता रही है। वहीं, विपक्ष बजट के प्रावधानों के साथ प्रदेश की समस्याओं और जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। इसके अलावा सत्र के कम समय की अवधि को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में गैरसैंण में किया गया यह सत्र केवल बजट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आगामी चुनावों के लहज़े से भी देखा जा रहा है। क्योंकि सरकार के इस अंत्रिम अनुपूरक को गैरसैण में पारित किया गया है, वही यह भी देखने वाली बात होगी की चुनावों के परिणामों के बाद आने वाली सरकार भविष्य में भी क्या इसी प्रकार कुछ ऐतिहासिक कदम गैरसैण के लिए उठाती है। बरहाल जो भी हो लेकिन इन सबके चलते पक्ष विपक्ष के बीच आपसी आरोप प्रत्यारोप और सियासी बयानबाज़ी भी चरम पर देखने को मिल रही है।
भराड़ीसैंण विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय अनुपूरक बजट सत्र अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दिया गया हैं। पहले दिन भारी हंगामे के बाद से शुरु किये गये बजट सत्र में 7844.18 लाख रुपये के अनुपूरक बजट को पारित किया गया, इसके साथ ही एक ही वर्ष में गैरसैण विधानसभा में आयोजित सत्र को अहम माना जा रहा हैं। हालांकि सदन की कार्यवाही के बीच कांग्रेस काम रोको प्रस्ताव लाने की तैयारी में थी। कांग्रेस के अनुसार नियम 310 के तहत काम रोको प्रस्ताव लाने की तैयारी, इसके साथ ही नियम 18 के अंतर्गत सूचनाएं दी गई। कांग्रेस का मानना था कि सदन सुचारू रूप से चले और अंतिम दिन महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा हो, ताकि विपक्ष नियमों के तहत अपनी बात रख सके। वहीं, कांग्रेस की इस तैयारी पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास मुद्दे नहीं हैं और उसका काम ही हर काम को रोकना है। उन्होंने कांग्रेस पर देश में अराजक स्थिति पैदा करने और त्योहारों के दौरान धरना प्रदर्शन कर व्यापारियों और आम जनता को परेशान करने का आरोप लगाया। करीब डेढ़ दिन चले विधानसभा सत्र में आगामी चुनाव को लेकर जनता के मुद्दे उठाने को लेकर सड़क से सदन तक गरमा गर्मी का मौहौल देखने को मिला, सभी इस सत्र के दौरान सदन में सरकार को घेरने और सदन के बहार कई छोटे बड़े दल जनता की आवाज को उठाते हुए शक्ति प्रदर्शन करते दिखाई दिए। ऐसे में सरकार का आज अंतरिम सत्र समापत हो गया है। लेकिन विपक्ष सत्र की अवधि को लेकर लगातार सवाल भी खड़े कर रहा है, और अब इस भराड़ीसैंण विधानसभा में नई सरकार और नई जनप्रधि 2027 के चुनाव का ताज पहनकर नजर आएंगे। जिसका दंगल अभी से शुरू हो गया है।
प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी कहे जाने वाले गैरसैंण विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय अनुपूरक बजट सत्र कई अहम राजनीतिक संदेशों व विषयों के साथ जारी है। 7844.18 लाख रुपये के अनुपूरक बजट के पारित होने के साथ सरकार ने विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान का रास्ता साफ किया, तो वहीं विपक्ष ने सदन की अवधि और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की है। अब सवाल यह है कि इस बजट का लाभ प्रदेश की जनता को किस हद तक मिलता है और सरकार अपनी घोषणाओं को धरातल पर उतारने में कितनी सफल रहती है। वहीं, गैरसैंण में एक साल के भीतर दो बार विधानसभा सत्र आयोजित होना इस चर्चा को भी आगे बढ़ाता है कि प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी में नियमित रूप से सदन की कार्यवाही कैसे सुनिश्चित की जाए। ऐसे में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और विपक्ष के बीच यह सियासी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत भी दे रही है।