उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में जैसे जैसे 2027 में होने जा रहे चुनाव नज़दीक आ रहे है, वैसे वैसे प्रदेश का राजनितिक माहौल धीरे धीरे अभी से गर्मागर्मी वाला होने लगा है. सभी राजनीतिक दल अभी से सक्रिय होते दिखाई देने लगे है.इसी के चलते राज्य सरकार भी सभी कार्य तेज़ी से करती नज़र आ रही है,और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इन दिनों विभिन्न विधानसभाओं की समीक्षा बैठकों के जरिए विकास कार्यों और मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति का जायजा ले रहे हैं. इन बैठकों में न केवल चल रही योजनाओं की स्थिति पर चर्चा हो रही है, बल्कि ये भी देखा जा रहा है कि अब तक की गई घोषणाएं किस स्तर तक पूरी हो चुकी हैं, और किन योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है.कहा यह भी जा सकता है, कि चुनावी साल नजदीक आते ही सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी पर निगरानी और मॉनिटरिंग को और मजबूत कर दिया गया है. बीते दिनों देखा गया की प्रदेश की सियासत में धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर भाजपा द्वारा विभिन्न बड़े स्तर के कार्यक्रम आयोजित किये गये, साथ ही कई केंद्रीय नेताओं ने प्रदेश में शिरकत करके धामी सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच गिनवाने का काम भी किया. लेकिन जहाँ एक ओर सत्ता दल भाजपा धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने को अभी भी ऐतिहासिक पहल व उपालब्धि करार देता नज़र आ रहा है, वही प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस अभी भी नाखुश नज़र आ रही है. सरकार की इस कवायद पर विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस का मानना है कि सरकार केवल दावे कर रही है. जबकि, धरातल पर विकास कार्यों की स्थिति इतनी मजबूत नहीं है. कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह अब तक किए गए कार्यों का पूरा लेखा-जोखा जनता के सामने रखने के लिए श्वेत पत्र जारी करे, क्योंकि राज्य में कई योजनाये केवल कागज़ो तक ही सीमित रह गई है, साथ ही कई जगह बजट का सही प्रकार से उपयोग भी नही हो पाया है. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि खर्च किये गये बजट में अब तक जनता को कितना लाभ मिला है. वही कांग्रेस द्वारा सरकार पर उठाये गये सवालों के बाद प्रदेश की सियासत में बयानबाज़ी और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरु हो गया है.
प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने है, वही चुनावी साल में मुख्यमंत्री द्वारा न केवल अपने तमाम कार्यक्रमों में तेजी लाई गई है, बल्कि समीक्षा और घोषणाओं को पूरा करने के लिए भी अधिकारियों पर मॉनिटरिंग सिस्टम बढ़ाया गया है. इसी के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों विधानसभाओं की समीक्षा कर रहे हैं. जिसके तहत वे मुख्यमंत्री घोषणाओं पर हुए काम का भी ब्यौरा ले रहे हैं. लेकिन प्रदेश की राजनीति में विपक्ष मुख्यमंत्री धामी के कार्यों को लेकर नाखुश दिखाई दे रहा है. प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस द्वारा धामी सरकार की घोषणाओं और योजनाओं पर कई सवाल खड़े किये गये है, जिसमे विपक्ष अब तक के सरकार द्वारा किये गये कार्यों से जनता को मिले लाभ का बायोडाटा माँगने की जिद्द करता दिखाई दिया है. जिसके बाद सत्ता पक्ष भाजपा की ओर से भी पलटवार और तंज का सिलसिला प्रारम्भ हो गया है. वही सत्ता पक्ष विपक्ष के हर सवालों के उत्तर देने के लिए सरकार को तैयार बताता हुआ नज़र आ रहा है.
उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर पक्ष विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप देखने को मिल रहा है. इस बार विपक्ष ने मुख्यमंत्री धामी द्वारा विधानसभाओं की समीक्षा बैठकों के जरिए विकास कार्यों और घोषणाओं की प्रगति का जायजा लेने के बीच कई सवाल खड़े कर दिये है, साथ ही सरकार से श्वेत पत्र जारी करने पर भी जोर डाला है, जिसपर सत्ता पक्ष भाजपा की प्रतिकिर्या सामने आते दिखाई दे रही है. भाजपा का मानना है कि विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने से पीछे नहीं हटना चाहिए. भाजपा ने पलटवार किया है कि विपक्ष को भी अपने कार्यकाल का बायोडाटा भी दिखाने की जरूरत है, साथ ही आज प्रदेश जिस गति से विकास की ओर बढ़ रहा है उस ओर भी विपक्ष को ध्यान देना चाहिए, तभी विपक्ष को पता चल पायेगा कि उनके कार्यकाल में और वर्तमान के कार्यकाल के दौरान किये गये कार्यों में कितना अंतर दिखाई दे रहा है.
2027 के चुनाव में अभी समय है, लेकिन सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. जहाँ सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है, तो वहीं विपक्ष सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है. बरहाल देखना दिलचस्प होगा कि इस गहमागहमी के बाद 2027 में कौन परचम लहराता है, लेकिन कही न कही इस बीच सरकार पर उठते सवालों ने विषय को भी गंभीर बनाया है, देखने वाली बात यह भी होगी की किस प्रकार विपक्ष के श्वेत पत्र की मांग पर सरकार किस प्रकार कार्य करती दिखेगी और विपक्ष के सवालों का जवाब देती है।