जोधपुर के तालाब में फिर छाया गुलाबी रहस्य, एक महीने में दूसरी बार बदला पानी का रंग; ग्रामीणों में दहशत

राजस्थान के जोधपुर के तनावड़ा गांव में जोजरी नदी किनारे स्थित तालाब का पानी एक बार फिर गुलाबी हो गया है. करीब एक महीने के भीतर दूसरी बार पानी का रंग बदलने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है. लोगों को आशंका है कि तालाब में किसी रासायनिक या औद्योगिक इकाई से निकलने वाला प्रदूषित पानी पहुंच रहा है.

Knews Desk- जोधपुर के लूणी विधानसभा क्षेत्र के तनावड़ा गांव में एक तालाब का पानी अचानक गुलाबी रंग का नजर आने लगा है. खास बात यह है कि करीब एक महीने में दूसरी बार पानी का रंग बदला है. बार-बार सामने आ रही इस घटना ने ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है. लोग पानी में किसी रासायनिक पदार्थ के मिलने की आशंका जता रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक महीने पहले भी तालाब का पानी गुलाबी हो गया था. उस समय भी पानी के प्रदूषित होने की आशंका जताई गई थी. अब दोबारा वही स्थिति सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है.

पानी का इस्तेमाल करने से बच रहे ग्रामीण

तालाब का रंग बदलने के बाद ग्रामीणों ने एहतियात के तौर पर इसके पानी का इस्तेमाल बंद कर दिया है. पशुपालकों ने भी मवेशियों को तालाब का पानी पिलाना बंद कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पानी की वैज्ञानिक जांच नहीं हो जाती, तब तक इसके इस्तेमाल से बचना ही बेहतर है.

लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल और जिला प्रशासन से तालाब के पानी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की है. ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि पानी के रंग में बदलाव की वजह सामने आने के साथ-साथ यह भी पता लगाया जाए कि अगर किसी रासायनिक या औद्योगिक स्रोत से पानी तालाब में पहुंच रहा है तो वह कहां से आ रहा है.

भूजल और खेती पर भी मंडरा रहा खतरा

ग्रामीणों की चिंता सिर्फ तालाब के पानी तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि अगर पानी में कोई हानिकारक रसायन मौजूद है और वह जमीन के भीतर रिसता रहा, तो आसपास के भूजल पर भी इसका असर पड़ सकता है. इसके अलावा कृषि भूमि और फसलों के प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाब के आसपास तार-कंटीली बाड़ लगाने की मांग भी की है, ताकि लोग और पशु गलती से इस पानी के संपर्क में न आएं.

फिलहाल तालाब के गुलाबी होने की असली वजह सामने नहीं आई है. अब पानी की लैब जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि इसके पीछे कोई प्राकृतिक प्रक्रिया है या फिर रासायनिक अथवा औद्योगिक प्रदूषण.

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