मचा शोर चंदा चोर ! 

देश और प्रदेश में इन दिनों मंदिरों में चढ़ावा चोरी के मामले सुर्खियों में हैं.अयोध्या राम मंदिर के बाद अब चढ़ावा चोरी का शोर देवभूमि उत्तराखंड में भी लगातार सुनाई दे रहा है. हिंदूवादी संगठन भैरव सेना ने बद्रीनाथ धाम में BKTC के एक कर्मचारी पर चढ़ावे की चोरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं.मंदिर समिति मामले की जांच कर रही है,वही इन आरोपों के बाद राज्य के विभिन्न मंदिरों में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए नई कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है.चढ़ावा चोरी के प्रकरण सामने आने के बाद धर्मनगरी हरिद्वार के सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर में बड़ा फैसला लिया गया है,जहाँ अब मंदिर के पुजारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे,और किसी भी पुजारी को चढ़ावे या दान के पैसे जेब में रखने की अनुमति भी नही होगी. जिसके चलते दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यों की एक समिति गठित की गई है.मंदिर ट्रस्ट का मानना है,कि नई व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करना और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करना है. इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट ने सभी पुजारियों और कर्मचारियों को शुचिता बनाए रखने की शपथ दिलाई है, ट्रस्ट ने सख्त चेतावनी भी दी है,कि यदि कोई भी पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे का निजी इस्तेमाल करते पकड़ा गया तो उसे तत्काल निष्कासित किया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी.वही जहां एक ओर सनातन धर्म की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिरों में सुरक्षा के कड़े उपाय किए जा रहे हैं,तो दूसरी ओर इन प्रकरणों को लेकर प्रदेश में सियासत भी तेज हो गई है.विपक्ष लगातार सरकार और बद्री-केदार मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस से बद्रीनाथ के विधायक मंदिर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. जिसके बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में और अधिक तूल पकड़ लिया है.विपक्ष जहां सरकार को घेर रहा है,वहीं सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की राजनीति बताकर पलटवार करता नज़र आ रहा है.

बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितता के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. हिंदू संगठन भैरव सेना ने इस मामले को करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) का कहना है कि शिकायत मिलते ही जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी और जांच रिपोर्ट सामने आने से पहले किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.वही प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने अपने पुजारियों को सुचिता बनाए रखने की शपथ दिलाई है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने मंदिर के सभी पुजारी और अन्य स्टाफ को शपथ दिलाई। साथ ही चेतावनी भी दी की अगर कोई भी पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे का निजी इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे ना सिर्फ निष्कासित किया जाएगा बल्कि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।इस पूरे मामले पर राजनीति भी अपने चरम पर है.जिसको लेकर कांग्रेस के विधायक बद्रीनाथ में मौन व्रत पर बैठ गए है.साथ ही चोरी प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे है. 

देश व प्रदेश मंदिरों में चढ़ावा चोरी के इन मामलों ने देवभूमि की धार्मिक आस्था और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा उठाए गए कदम निश्चित ही पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में अहम हैं. बिना जेब वाले कुर्ते और निगरानी समिति जैसे फैसले विश्वास बहाली का प्रयास हैं.वहीं बद्रीनाथ धाम में लगे आरोपों की जांच अभी जारी है, जिसका नतीजा दस जुलाई तक आना बाकी है.दूसरी ओर इस विषय पर गरमाई सियासत ने मामले को आस्था से हटाकर राजनीतिक बहस का रूप दे दिया है.विपक्ष और सत्ता पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है, कि क्या इन उपायों से मंदिरों की पवित्रता और चढ़ावे की शुचिता वास्तव में सुनिश्चित हो पाएगी.अब सबकी निगाहें मंदिर समितियों की नई व्यवस्था और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

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