निहंग मांगे रिहाई,प्रशासन व्यवस्था की दुहाई ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, शान्त वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में इन दिनों हालात गंभीर बने हुए है.बीते दिनों प्रदेश के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद उत्तराखंड में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं, जिसके चलते विवाद सुर्खियों में कम होने का नाम नहीं ले रहा है. आपको बता दे, कि कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के दौरान कुछ निहंग सिख तलवार से वार करते दिखाई दिए थे.आक्रोशित स्थानीय लोगों के चलते पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ निहंग सिखों को गिरफ्तार किया गया और मामले की जांच की ही जा रही थी.तो वही कुछ अन्य प्रदेशों के सिख समुदाय के लोगों द्वारा गिरफ्तार हुए निहंग सिखों की रिहाई और कथित एकतरफा कार्रवाई के विरोध में निहंग सिखों ने 25 जून को उत्तराखंड कूच का आह्वान किया था.जिसके बाद रिहाई की मांग को लेकर कल रात को पंजाब के कुछ निहंग सिख विकासनगर कुल्हाल सीमा से जबरन उत्तराखंड में घुस गए. पुलिस द्वारा निहंगों को घुसने से रोकने के लिए सीमा पर अवरोधक लगा रखे थे,लेकिन अस्त्र-शस्त्रों से लैस निहंग अवरोधकों पर चढ़ गए और उसे हटा दिया. कुछ निहंग सिख तलवार लहराते हुए भी नजर आए और वहां काफी देर तक अराजकता की स्थिति बनी रही.इसी दौरान कुछ निहंग उत्तराखंड में दाखिल हो गए और मौके पर तैनात पुलिस बेबस भी नजर आई. हालांकि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देहरादून और विकासनगर क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया है और साथ ही निहंग सिखों के उत्तराखंड में प्रवेश और प्रशासन के साथ जारी गतिरोध के बीच पूरे प्रदेश की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं. फिलहाल देहरादून के कुल्हाल बॉर्डर हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर भारी गतिरोध और बैरिकेड्स टूटने के बाद सरकार, पुलिस और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी की जा रही है,लेकिन सिख अभी भी अपनी मांग पर अड़े है.इस मामले ने राजनितिक तूल भी पकड़ लिया है, विपक्ष का आरोप है,कि सत्ताधारी सरकार अराजकता फैलाने वालो के सामने बेबस पड़ रही है. जिसके चलते अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है.

निहंग सिखों ने देर रात उत्तराखंड और हिमाचल बॉर्डर पर कुल्हाल गेट बॉर्डर पर लगी बैरिकेडिंग को हटाकर और कुछ वाहन में तोड़फोड़ कर बॉर्डर पार कर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर लिया था. रातभर निहंग सिखों को लेकर पुलिस की मुस्तैदी भी रही है.देर रात को पुलिस बल प्रेमनगर में भी तैनात रहा, लेकिन निहंग सिख प्रेमनगर नहीं पहुंचे. बाद में पुलिस को पता चला कि निहंग रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में गए हैं. इसके बाद उनको समझा-बुझाकर पांवटा साहिब वापस भेजा गया था.देर रात चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद भी सभी निहंग सिख अभी भी पांवटा साहिब के गुरुद्वारे में हैं.उनकी संख्या करीब 150-200 बताई जा रही है. कुल्हाल बॉर्डर पर पुलिस बल और आईटीबीपी के जवान मुस्तैदी से तैनात हैं.उनकी मांग है.की कर्णप्रयाग में अरेस्ट किये गए उनके निहंग सिखों को बिना कार्यवाही करे रिहा किया जाए साथ ही उनके साथ की गई मारपीट के आरोपियों को भी पुलिस हिरासत में लिया जाए जिस पर एक बार देर रात की घटना के बाद राजनीतिक माहौल भी बेहद गरमा गया है.

उत्तराखंड की शांत वादियों में उपजे तनाव ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. कर्णप्रयाग से शुरू हुआ विवाद विकासनगर बॉर्डर तक पहुंच चुका है.और हाई अलर्ट के बावजूद गतिरोध बरकरार है.निहंग सिख गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े हैं,वहीं स्थानीय लोगों का आक्रोश थम नहीं रहा हथियारों के साथ प्रदर्शन और बैरिकेड तोड़ने की घटनाएं पुलिस-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हैं.वही मामला सियासी रंग ले चुका है,विपक्ष सरकार को बेबस बता रहा है,तो सत्ता पक्ष हालात नियंत्रण में बताकर पलटवार कर रहा है.चार धाम और हेमकुंड साहिब जैसी यात्राओं वाले उत्तराखंड में तनाव लंबा खिंचा तो पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा.जिसके लिए सभी पक्षों को संयम और संवाद से समाधान निकालना होगा और प्रशासन को भी बिना पक्षपात सख्ती से कानून लागू करना होगा ताकि प्रदेश में अमन-चैन बरकरार रहे।

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