क्या पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं?…. केंद्र सरकार के बयान पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

डिजिटल डेस्क- क्या पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा करने का एक माध्यम है या यह आपके भारतीय नागरिक होने का पक्का सबूत भी है? केंद्र सरकार के एक हालिया बयान ने इस बुनियादी सवाल को देश भर में चर्चा का विषय बना दिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से साफ किया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं, बल्कि मुख्य रूप से एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज है। सरकार के इस रुख के सामने आते ही विपक्ष ने तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए हैं, जिससे नागरिकता की पहचान को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

सुप्रिया श्रीनेत ने दागे कई तीखे सवाल

सरकार के इस बयान पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसे जारी करने से पहले होने वाले कड़े पुलिस वेरिफिकेशन और सरकारी दस्तावेजों की गहन जांच का आखिर क्या महत्व रह जाता है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या अब दुनिया के दूसरे देशों के इमिग्रेशन अधिकारियों को यह मान लेना चाहिए कि भारतीय पासपोर्ट रखने वाला हर व्यक्ति जरूरी नहीं कि भारत का नागरिक ही हो? विपक्ष ने पूछा है कि इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की साख पर क्या असर पड़ेगा?

क्या कहता है देश का कानून और क्यों खड़ी हुई उलझन?

आम जनता के बीच हमेशा से यह धारणा रही है कि भारतीय पासपोर्ट केवल और केवल भारत के नागरिकों को ही जारी किया जाता है। ऐसे में सरकार का यह तकनीकी बयान लोगों को उलझन में डाल रहा है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है। देश की अदालतें भी कई अलग-अलग मामलों में यह टिप्पणी कर चुकी हैं कि पासपोर्ट, वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र अपने-आप में नागरिकता का अंतिम या अकाट्य सबूत नहीं माने जा सकते। नागरिकता का अंतिम फैसला वैधानिक रिकॉर्ड और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही तय किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *