सिद्धिविनायक मंदिर दान विवाद पर सरकार सख्त, 5 साल के चढ़ावे की होगी जांच

Knews Desk– मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में कथित दान घोटाले के आरोपों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंदिर में पिछले पांच वर्षों के दौरान दान पेटी में जमा हुई नकदी और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का विस्तृत ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद मंदिर प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।यह मामला तब चर्चा में आया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी से हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के कुछ कर्मचारी इस कथित गड़बड़ी में शामिल थे और इस संबंध में उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र भी लिखा था। राज ठाकरे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित होगा।

राज ठाकरे के आरोपों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पिछले पांच वर्षों के सभी दान और चढ़ावे का ऑडिट कराने का फैसला किया है। इस ऑडिट में नकदी के साथ-साथ सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का भी रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। माना जा रहा है कि जांच में यदि किसी तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।हालांकि, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने राज ठाकरे के आरोपों को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर और ट्रस्टी राहुल लोंढे का कहना है कि ट्रस्ट ने मई महीने में ही कानून एवं न्याय विभाग को पत्र लिखकर पिछले पांच वर्षों के दान का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि मंदिर प्रशासन ने खुद ही गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से संपर्क किया था और जांच में पूरा सहयोग दिया।

ट्रस्ट के अनुसार, मार्च 2026 में दान पेटी से नकदी गायब होने की घटना सामने आई थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच में कुछ कर्मचारी छोटी दान पेटी से पैसे निकालते हुए पकड़े गए थे। इसके बाद एसीबी की निगरानी में कार्रवाई की गई, जिसमें मुख्य आरोपी राजन पेंडुलकर समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 46 कर्मचारियों को निलंबित किया गया। ट्रस्ट का दावा है कि उसने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीआईडी जांच की भी मांग की है।मंदिर प्रशासन ने यह भी बताया कि दान चोरी के अलावा ऑनलाइन भुगतान लेकर वीआईपी दर्शन कराने, फूल विक्रेताओं और टैक्सी चालकों के जरिए अवैध दर्शन कराने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई है। प्रशासन का कहना है कि अब ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

वहीं, इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। ट्रस्ट की ओर से उद्धव ठाकरे गुट से जुड़े लोगों पर लगाए गए आरोपों के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने के बजाय निष्पक्ष जांच होने दी जानी चाहिए और जांच एजेंसियां ही तय करेंगी कि दोषी कौन है।फिलहाल सिद्धिविनायक मंदिर दान मामले की जांच और सरकार के आदेश पर होने वाला पांच वर्षों का ऑडिट पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकार दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।

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