Knews Desk- बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया है। आधिकारिक तौर पर उन्होंने इस्तीफे की वजह खराब स्वास्थ्य बताई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता संघर्ष और बढ़ते राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से कथित संपर्क की खबरें सामने आने के बाद राष्ट्रपति पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया था।
स्वास्थ्य का हवाला, लेकिन राजनीतिक कारणों की चर्चा तेज
अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति बने मोहम्मद शहाबुद्दीन का कार्यकाल 2028 तक था। इसके बावजूद उन्होंने समय से पहले इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंप दिया है।
मीडिया से बातचीत में शहाबुद्दीन ने कहा कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और इसी वजह से पद छोड़ने का फैसला लिया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घटनाक्रम के पीछे केवल स्वास्थ्य कारण नहीं हैं।
अवामी लीग सरकार के दौर में बने थे राष्ट्रपति
मोहम्मद शहाबुद्दीन 1971 के मुक्ति संग्राम के सेनानी रह चुके हैं और न्यायपालिका में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्ष 2023 में जब वे राष्ट्रपति चुने गए थे, तब संसद में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का बहुमत था।
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता छोड़ने और देश से बाहर जाने के बावजूद शहाबुद्दीन संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा बने रहे। उनके कार्यकाल के दौरान ही मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, अंतरिम सरकार और राष्ट्रपति के बीच रिश्ते लंबे समय से सहज नहीं थे।
कथित फोन संपर्क बना चर्चा का विषय
बांग्लादेश के कुछ मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने इलाज के लिए विदेश यात्रा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से संपर्क किया था। बाद में ऐसी भी खबरें सामने आईं कि दोनों के बीच दोबारा संवाद स्थापित करने की कोशिश हुई।
इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर यह कहा जा रहा है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति के प्रति भरोसा कम होने की बात जताई, जिसके बाद उन पर पद छोड़ने का दबाव बढ़ा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शेख हसीना की वापसी की घोषणा के बाद बढ़ी हलचल
हाल ही में शेख हसीना ने एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वह और उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता इस वर्ष के अंत तक बांग्लादेश लौटकर अदालत के समक्ष पेश होने की योजना बना रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद देश की राजनीति और अधिक संवेदनशील हो गई। ऐसे में राष्ट्रपति के पद पर बने रहने को लेकर भी सत्ता पक्ष के भीतर असहजता बढ़ी।
संविधान के अनुसार आगे क्या होगा?
बांग्लादेश के संविधान के तहत राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति अपना इस्तीफा संसद के स्पीकर को सौंपते हैं और उसके बाद सांसदों के मतदान से नए राष्ट्रपति का चयन किया जाता है।
मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि अगला राष्ट्रपति सत्तारूढ़ गठबंधन या उसके समर्थित उम्मीदवारों में से हो सकता है।