KNEWS DESK – Iran और United States के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ईरान ने अमेरिका को 14 बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव भेजा है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया।
मोहसिन नकवी हाल ही में दो दिनों के ईरान दौरे पर थे, जहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से मुलाकात की। इसी दौरान यह नया प्रस्ताव तैयार किया गया। बताया जा रहा है कि यह कदम कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al Thani की मध्यस्थता के बाद उठाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने प्रस्ताव में साफ कहा है कि वह न तो परमाणु हथियार बना रहा है और न ही भविष्य में ऐसा करने का इरादा रखता है। हालांकि तेहरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को पहले भरोसा बहाल करना होगा।
ईरानी न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेहरान का मानना है कि वॉशिंगटन पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। ऐसे में पहले अमेरिका को अपने व्यवहार से भरोसेमंद साबित करना होगा, तभी बातचीत आगे बढ़ पाएगी।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में बयान देकर कहा था कि “धैर्य और समय खत्म हो रहा है।” इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल तीन बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। पहला मुद्दा ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलो संवर्धित यूरेनियम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि यह यूरेनियम उसे सौंप दिया जाए, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। तेहरान का कहना है कि वह अपने देश में ही इसे कम संवर्धित स्तर पर लाएगा।
दूसरा बड़ा विवाद ईरान की जब्त संपत्तियों को लेकर है। ईरान चाहता है कि दुनियाभर में फ्रीज की गई उसकी संपत्तियों का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा बातचीत के दौरान ही रिलीज किया जाए। वहीं अमेरिका का कहना है कि यह रकम समझौते के बाद दी जाएगी।
तीसरा और सबसे संवेदनशील मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर है। ईरान चाहता है कि अमेरिका आधिकारिक रूप से मान्यता दे कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर तेहरान का नियंत्रण है। इससे ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूल सकेगा। लेकिन अमेरिका इस मांग को मानने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर दोबारा सैन्य दबाव बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। हाल ही में ट्रंप ने Benjamin Netanyahu से फोन पर बातचीत भी की थी, जिससे मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।