फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ युवाओं का विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। पेरिस से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया है। अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों को पुलिस हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें 87 फीसदी नाबालिग बताए जा रहे हैं। स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों और संसाधनों की कमी इस आंदोलन की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
Knews Desk– फ्रांस में सितंबर में शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। शुरुआत पेरिस के उत्तरी हिस्से के एक हाई स्कूल से हुई थी, जहां छात्र शिक्षकों के समर्थन में स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर आवाज उठा रहे थे। छात्रों की शिकायत थी कि स्कूलों में लगातार बढ़ती भीड़ के मुकाबले संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। कई जगह इमारतों की स्थिति खराब है और शिक्षकों की भी कमी है।
प्रदर्शन बढ़ने के साथ कई स्कूलों को बंद कराया गया। रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 400 स्कूल बंद रहे और कई स्थानों पर हिंसा हुई। फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने हिंसा के लिए ‘हिंसक अल्पसंख्यकों’ को जिम्मेदार बताया है। वहीं, न्याय मंत्रालय के अनुसार हिरासत में लिए गए 5,060 लोगों में से 87 फीसदी नाबालिग हैं। सरकार का आरोप है कि आंदोलन की शुरुआत हार्ड-लेफ्ट नेताओं के प्रभाव से हुई, हालांकि LFI सांसद लुई बोयार्ड ने इस आरोप से इनकार किया है।
कैसे शुरू हुआ था प्रदर्शन?
पेरिस के सेंट-एक्सुपरी हाई स्कूल में 21 सितंबर को छात्रों ने शिक्षकों के साथ मिलकर कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। शुरुआती विरोध पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। बाद में स्कूल प्रशासन ने छात्रों की मांगें स्वीकार कर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की, जिसके बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई।
लेकिन इसी बीच दूसरे स्कूलों के छात्रों ने भी इसी तरह की मांगें उठानी शुरू कर दीं। देखते ही देखते विरोध का दायरा बढ़ता गया और प्रदर्शन पेरिस से निकलकर देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया।
प्रदर्शन के दौरान पेरिस और आसपास के इलाकों के हाई स्कूलों के छात्रों ने स्कूलों के गेट बंद करने शुरू कर दिए। कुछ ही समय में उत्तर में लिले से लेकर दक्षिण में मार्सिले तक कई स्कूलों को बंद किया जाने लगा।
कई जगह प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और बैरिकेड लगाए। शिक्षकों पर हमले और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। आंदोलन शुरू होने के बाद 100 से ज्यादा हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
हिंसा में छात्र भी घायल
आंदोलन के दौरान छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। लेंस शहर के पास हुए एक धमाके में एक छात्र का हाथ फ्रैक्चर होने की खबर है। एक 14 वर्षीय छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला गिरने की भी जानकारी सामने आई। जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर के बाद उसकी सर्जरी हुई।
उत्तर-पूर्वी शहर लेंस में एक छात्र के कथित तौर पर ग्रेनेड उठाने के दौरान हाथ खोने की बात सामने आई है। वहीं टूर्स में एक अन्य छात्र की एक आंख की रोशनी जाने की खबर है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतने के आरोप भी लगाए गए हैं।
हिंसक प्रदर्शन भले ही हाल में तेज हुआ हो, लेकिन छात्रों की शिकायतें लंबे समय से चली आ रही हैं। फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में भीड़भाड़, अपर्याप्त सुविधाएं और कर्मचारियों की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से उठते रहे हैं।
कई वर्षों से ऐसे वीडियो सामने आते रहे हैं जिनमें कक्षाओं में पर्याप्त डेस्क और कुर्सियां नहीं होने की स्थिति दिखाई गई है। कई बार किसी शिक्षक के अनुपस्थित रहने पर उसकी जगह दूसरे शिक्षक की व्यवस्था नहीं होने से कक्षाएं तक रद्द करनी पड़ती हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकार इन समस्याओं का समाधान करने में पर्याप्त तेजी नहीं दिखा रही है।
कई मोर्चों पर दबाव में फ्रांस सरकार
छात्र आंदोलन के अलावा फ्रांस सरकार आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर भी दबाव में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ने के कारण कर्ज संभालने की लागत भी बढ़ रही है।
देश की आबादी के बूढ़ी होने के साथ पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च बढ़ रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद रक्षा खर्च में भी इजाफा हुआ है।
वहीं, सरकार को सिर्फ छात्रों के विरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारी, फायरफाइटर, स्वास्थ्यकर्मी और मछुआरे भी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी सरकारी खर्च पर रोक लगाने और वेतन रोकने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सरकार के सामने इन मांगों का ठोस समाधान निकालने की चुनौती है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब फ्रांस सरकार के लिए कई मोर्चों पर बढ़ते दबाव की बड़ी वजह बन गया है।