Knews Desk– All India Institute of Medical Sciences (एम्स) दिल्ली ने ट्रांसप्लांट मेडिसिन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 18 साल बाद एक मरीज का किडनी और पैंक्रियास का एक साथ सफल ट्रांसप्लांट किया है। यह जटिल सर्जरी 30 वर्षीय मरीज पर की गई, जो लंबे समय से टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित था। लगातार बढ़ती बीमारी के कारण उसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं और वह एंड-स्टेज रीनल डिजीज की स्थिति में पहुंच गया था। डॉक्टरों के अनुसार, केवल किडनी ट्रांसप्लांट इस मरीज के लिए पर्याप्त नहीं था, क्योंकि डायबिटीज की समस्या बनी रहती और नई किडनी पर भी असर पड़ सकता था। इसी वजह से डॉक्टरों ने किडनी और पैंक्रियास दोनों का एक साथ ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया।
यह सर्जरी 14 अप्रैल 2026 को एम्स दिल्ली के सर्जरी विभाग में की गई। इस ऑपरेशन का नेतृत्व प्रोफेसर वी.के. बंसल और प्रोफेसर असुरी कृष्णा ने किया। सर्जिकल टीम में डॉ. संजीत राय और डॉ. सुषांत सोरेन शामिल रहे। इसके अलावा Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) के रीनल ट्रांसप्लांट विभाग से प्रो. आशीष शर्मा और डॉ. दीपेश ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। एनेस्थीसिया विभाग से प्रो. राहुल और डॉ. निशांत ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई, जबकि नेफ्रोलॉजी विभाग से प्रो. भौमिक और प्रो. महाजन तथा एंडोक्रिनोलॉजी विभाग से प्रो. निखिल टंडन ने विशेषज्ञ सलाह दी। सर्जरी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी पूरी रात काम करके इस कठिन प्रक्रिया को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह ट्रांसप्लांट एक 50 वर्षीय ब्रेन-डेड डोनर के अंगों की मदद से संभव हो पाया। डोनर की पहचान Post Graduate Institute of Medical Sciences में हुई थी। डोनर परिवार के अंगदान के फैसले ने मरीज को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ने से इस तरह की जटिल और जीवनरक्षक सर्जरी संभव हो पा रही हैं।

ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। नई किडनी ने सामान्य रूप से काम करना शुरू कर दिया है और मरीज का ब्लड शुगर स्तर भी नियंत्रित है। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब मरीज को इंसुलिन की बहुत कम जरूरत पड़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह का SPK यानी Simultaneous Pancreas-Kidney ट्रांसप्लांट उन मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होता है जो टाइप 1 डायबिटीज और किडनी फेलियर दोनों समस्याओं से जूझ रहे हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि SPK ट्रांसप्लांट मरीजों को डायलिसिस और बार-बार इंसुलिन लेने की निर्भरता से काफी हद तक राहत दिला सकता है। साथ ही इससे जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होता है और मरीज सामान्य जीवन जीने के करीब पहुंच सकता है। एम्स दिल्ली की यह सफलता देश में उन्नत ट्रांसप्लांट तकनीकों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण मानी जा रही है।