Knews Desk– हाल ही में हंता वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर एक क्रूज शिप पर सामने आए मामलों के बाद. कुछ रिपोर्ट्स में इस वायरस से जुड़ी मौतों और कई लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. हंता वायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों, उनके मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है. हालांकि अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह वायरस इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है और क्या भविष्य में यह एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा बन सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार

विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है. दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि का कहना है कि किसी भी वायरस का खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी तेजी से फैलता है और संक्रमित व्यक्ति पर उसका कितना गंभीर असर पड़ता है. हंता वायरस को लेकर अभी कई स्तरों पर रिसर्च जारी है और स्वास्थ्य एजेंसियां इसके फैलाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
डॉक्टरों के मुताबिक हंता वायरस के अधिकतर मामले संक्रमित चूहों के संपर्क से जुड़े पाए गए हैं. यह वायरस तब फैल सकता है जब कोई व्यक्ति ऐसे स्थान पर जाए जहां चूहों की गंदगी मौजूद हो और वायरस वाले कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाएं. हालांकि कुछ मामलों में इंसानों से इंसानों में संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई है, लेकिन अभी तक ऐसे मामले बेहद सीमित माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और अध्ययन की जरूरत है.

शुरुआती लक्षण
हंता वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं. संक्रमित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है. गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों में संक्रमण जैसी स्थिति भी बन सकती है. इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना जा रहा है.
बचाव के लिए साफ-सफाई सबसे महत्वपूर्ण उपाय है. घर और आसपास चूहों की मौजूदगी को रोकना, गंदगी से बचना और संक्रमित जगहों की सफाई करते समय मास्क व ग्लव्स का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय लोगों को केवल आधिकारिक स्वास्थ्य जानकारी पर भरोसा करना चाहिए. फिलहाल यह वायरस बड़े स्तर पर फैलता हुआ नहीं दिख रहा, लेकिन सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है.