UPSC में कभी समस्या नहीं रही… सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक पर टिप्पणी कर जवाबदेही मांगी

Knews Desk– नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इतनी बड़ी परीक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि तमाम सुरक्षा उपायों और सिफारिशों के बावजूद पेपर लीक कैसे हुआ।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से पूछा कि यदि सभी सिफारिशों को लागू किया गया था, तो फिर यह घटना कैसे हुई। कोर्ट ने कहा कि या तो सिफारिशों में कोई कमी थी या फिर उनके क्रियान्वयन और निगरानी में गंभीर चूक हुई है। न्यायालय ने कहा कि इस मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए क्योंकि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है।

विशेषज्ञ समिति ने क्या कहा?

विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति ने कुल 60 सुझाव दिए थे, जिनमें से अधिकांश लागू किए जा चुके हैं। कुछ सुझावों पर अभी भी काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में आयोजित NEET-UG परीक्षा सफल रही थी और केवल कुछ केंद्रों पर बिजली संबंधी समस्याएं सामने आई थीं।

उन्होंने यह भी बताया कि NTA को अधिक मजबूत और सक्षम बनाने की सिफारिश की गई थी। आगामी 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं और सभी संभावित खामियों को दूर करने की कोशिश की गई है।

UPSC का उदाहरण देकर पूछे सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि जब तक वास्तविक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि UPSC जैसी परीक्षाओं में इस तरह की घटनाएं देखने को नहीं मिलतीं, इसलिए यह समझना जरूरी है कि आखिर चूक कहां हुई। कोर्ट ने यह भी कहा कि संस्थानों की मजबूती व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि मजबूत व्यवस्था और संस्थागत क्षमता पर निर्भर करती है।

केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है और परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्तर तक निगरानी के बावजूद ऐसी घटना हुई है, तो यह बेहद दुखद स्थिति है।

अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह 2 जुलाई से पहले विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। इसमें यह बताया जाए कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को कैसे सुरक्षित बनाया जाएगा, NTA को कैसे मजबूत किया जाएगा और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जाएगी।

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