Knews Desk। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने 14 अक्टूबर 2026 को यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया था। इसके तहत 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती के लिए सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी की गई। रिजल्ट सामने आने के बाद EWS श्रेणी की मेरिट लिस्ट में मनमोहन सिंह यदुवंशी नाम के अभ्यर्थी का चयन होने को लेकर विवाद शुरू हो गया। अभ्यर्थी के नाम और EWS कोटे से चयन पर उठ रहे सवालों के बीच बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपना पक्ष स्पष्ट किया है।UPPRPB ने बताया कि EWS श्रेणी की मेरिट लिस्ट में क्रम संख्या 400 पर दर्ज अभ्यर्थी मनमोहन सिंह यदुवंशी का चयन उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों और अभिलेखों के आधार पर किया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी अभ्यर्थी की श्रेणी का निर्धारण उसके नाम या उपनाम को देखकर नहीं किया जाता, बल्कि संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
बोर्ड के मुताबिक, किसी भी परीक्षा में अभ्यर्थियों की ओर से सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी और निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों तथा अन्य अभिलेखों की जांच की जाती है। इसके बाद शासन की ओर से समय-समय पर निर्धारित आरक्षण नियमों के अनुसार चयन से संबंधित निर्णय लिया जाता है। कांस्टेबल भर्ती 2025 के परिणाम में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है।UPPRPB ने यह भी कहा कि किसी अभ्यर्थी की जाति, वर्ग या श्रेणी के बारे में उसके नाम, उपनाम अथवा प्रचलित जातिगत टाइटल के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। इसलिए केवल नाम देखकर किसी उम्मीदवार के चयन या उसकी पात्रता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। बोर्ड ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अभ्यर्थी के बारे में बिना समुचित सत्यापन के अफवाह न फैलाएं।
बोर्ड ने अपने बयान में चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की अफवाह फैलाना दंडनीय अपराध है। साथ ही, ऐसे मामलों में अफवाह फैलाने वाले व्यक्तियों और सोशल मीडिया हैंडलों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में प्रस्तुत दस्तावेजों और लागू नियमों के आधार पर ही निर्णय लिया जाता है।यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती के इस मामले में बोर्ड के स्पष्टीकरण के बाद अब यह स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अभ्यर्थी का EWS श्रेणी से चयन प्रस्तुत प्रमाणपत्रों और अभिलेखों के आधार पर हुआ है। बोर्ड ने अभ्यर्थियों और आम लोगों से अपील की है कि वे भर्ती परिणामों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें और बिना प्रमाण के किसी उम्मीदवार के खिलाफ दावे न करें।