National Flag Day 2026: तिरंगे से चरखा क्यों हटाया गया? जानिए अशोक चक्र की कहानी

Knews Desk– हर साल 22 जुलाई को भारत में नेशनल फ्लैग डे (National Flag Day) मनाया जाता है। यह वही ऐतिहासिक दिन है, जब वर्ष 1947 में संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज के अंतिम स्वरूप को मंजूरी दी थी। इसी दिन तिरंगे के बीच बने चरखे की जगह अशोक चक्र को शामिल किया गया। इसके ठीक 24 दिन बाद, 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और यही तिरंगा देश की आजादी, एकता और सम्मान का प्रतीक बन गया।भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का वर्तमान स्वरूप एक दिन में तैयार नहीं हुआ था। आजादी के आंदोलन के दौरान कई अलग-अलग झंडे सामने आए, जिनमें स्वतंत्रता, स्वराज और राष्ट्रीय एकता की भावना झलकती थी। 1906 में कोलकाता में पहली बार एक राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसमें हरा, पीला और लाल रंग शामिल थे। इसके बाद 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने विदेश में भारतीय ध्वज फहराकर दुनिया के सामने भारत की स्वतंत्रता की मांग को मजबूती से रखा। 1917 में होमरूल आंदोलन के दौरान भी एक अलग ध्वज अपनाया गया, लेकिन इनमें से कोई भी पूरे देश का आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज नहीं बन पाया।

साल 1921 में स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी के सामने एक नए ध्वज का डिजाइन प्रस्तुत किया। इसमें लाल और हरे रंग के साथ बाद में सफेद रंग जोड़ा गया और बीच में चरखा रखा गया। चरखा महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन, आत्मनिर्भरता और श्रम के सम्मान का प्रतीक था। यह झंडा लंबे समय तक स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बना रहा।हालांकि, जब देश आजादी के करीब पहुंचा और राष्ट्रीय ध्वज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब यह महसूस किया गया कि राष्ट्रीय ध्वज किसी एक विचारधारा या आंदोलन का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। इसी कारण 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने चरखे की जगह अशोक चक्र को शामिल करने का निर्णय लिया।

अशोक चक्र सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के धर्म चक्र से लिया गया है। इसमें 24 तीलियां हैं, जो जीवन में निरंतर गति, प्रगति, न्याय, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं। इसे गहरे नेवी ब्लू रंग में तिरंगे की सफेद पट्टी के बीच रखा गया। यह परिवर्तन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि अशोक चक्र सभी भारतीयों के लिए समान रूप से स्वीकार्य राष्ट्रीय प्रतीक था और किसी एक संगठन या विचारधारा से जुड़ा नहीं था।संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे के वर्तमान स्वरूप को आधिकारिक मंजूरी दी। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, तो यही तिरंगा पहली बार स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में फहराया गया।

भारतीय तिरंगे के तीनों रंग भी विशेष संदेश देते हैं। केसरिया रंग साहस और त्याग, सफेद रंग शांति और सत्य, जबकि हरा रंग समृद्धि, विकास और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। बीच का अशोक चक्र राष्ट्र की निरंतर प्रगति और गतिशीलता का संदेश देता है।आज तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, विविधता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। 22 जुलाई का दिन हमें उस ऐतिहासिक फैसले की याद दिलाता है, जिसने भारतीय तिरंगे को उसका वर्तमान स्वरूप दिया और उसे दुनिया के सबसे सम्मानित राष्ट्रीय ध्वजों में शामिल कर दिया।

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