भारत का स्पेस मिशन अब नई उड़ान पर, PM मोदी ने बताया कब तैयार होगा स्पेस स्टेशन

Knews Desk– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश अब केवल चंद्रमा और मंगल मिशनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशन के जरिए भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर इतिहास रचा और अब अगला लक्ष्य गगनयान मिशन और वर्ष 2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन का निर्माण है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत को दुनिया के चुनिंदा अंतरिक्ष शक्तिशाली देशों की कतार में खड़ा कर सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। चंद्रयान मिशन की सफलता के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसके बाद भारत का अगला बड़ा लक्ष्य अपना स्पेस स्टेशन तैयार करना है, जहां भारतीय वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर वैज्ञानिक शोध कर सकेंगे।स्पेस स्टेशन एक विशाल अंतरिक्ष यान (Spacecraft) होता है, जो पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में लगातार घूमता रहता है। यह अंतरिक्ष यात्रियों के रहने, वैज्ञानिक प्रयोग करने और विभिन्न तकनीकी परीक्षणों के लिए बनाया जाता है। इसमें रहने की व्यवस्था, प्रयोगशालाएं, ऊर्जा प्रणाली, संचार उपकरण और जीवन-रक्षक सुविधाएं मौजूद होती हैं। अंतरिक्ष यात्री महीनों तक स्पेस स्टेशन में रहकर माइक्रोग्रैविटी में शोध कार्य करते हैं।

अंतरिक्ष में कैसे बनता है स्पेस स्टेशन?

स्पेस स्टेशन का निर्माण धरती पर एक साथ नहीं किया जाता। इसके अलग-अलग मॉड्यूल (Modules) और हिस्से पृथ्वी पर तैयार किए जाते हैं। बाद में इन्हें रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजा जाता है। अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यात्री और रोबोटिक सिस्टम इन सभी मॉड्यूल को जोड़कर एक बड़ा स्पेस स्टेशन तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कई स्पेसवॉक (Spacewalk) भी किए जाते हैं, जिनमें अंतरिक्ष यात्रियों को विशेष स्पेस सूट पहनकर स्टेशन के बाहर काम करना पड़ता है।

आमतौर पर स्पेस स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर (करीब 250 मील) की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया जाता है। सभी मॉड्यूल जुड़ने और जरूरी प्रणालियां सक्रिय होने के बाद यह पूरी तरह संचालन के लिए तैयार हो जाता है।

बनने में लगता है कई सालों का समय

स्पेस स्टेशन का निर्माण किसी एक मिशन में पूरा नहीं होता। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) है। अमेरिका (NASA), रूस (Roscosmos), यूरोप (ESA), जापान (JAXA) और कनाडा (CSA) की स्पेस एजेंसियों ने मिलकर इसका निर्माण किया था। इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी और इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग 13 साल लगे। वर्ष 2011 में इसका मुख्य निर्माण कार्य पूरा हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISS के निर्माण पर लगभग 150 अरब अमेरिकी डॉलर का खर्च आया, जो इसे दुनिया की सबसे महंगी वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल करता है।

2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन का लक्ष्य

भारत पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह वर्ष 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस परियोजना के जरिए भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाएगा। भारतीय स्पेस स्टेशन पर भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों का परीक्षण और लंबे समय तक मानव मिशनों से जुड़े प्रयोग किए जाएंगे। इससे देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई मजबूती मिलेगी और वैश्विक स्पेस सेक्टर में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

गगनयान मिशन की सफलता के बाद भारतीय स्पेस स्टेशन की दिशा में काम और तेज होने की उम्मीद है। यदि यह लक्ष्य तय समय पर पूरा होता है, तो भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद अपना स्वतंत्र स्पेस स्टेशन संचालित करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा।

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