MLA की मौत के बाद परिवार को मिलती है पेंशन या नहीं? समझिए पूरा नियम

Knews Desk– उत्तर प्रदेश के सबसे बुजुर्ग विधायकों में शामिल समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आलम बदी आजमी के निधन के बाद एक बार फिर पूर्व विधायकों की पेंशन और पारिवारिक पेंशन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलम बदी आजमी 92 वर्ष के थे. उनके निधन के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि किसी विधायक की मृत्यु होने पर उसकी पेंशन बंद हो जाती है या फिर परिवार के किसी सदस्य को इसका लाभ मिलता है. इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि पेंशन का हकदार कौन होता है और इसकी राशि कितनी होती है.भारत में विधायकों की पेंशन से जुड़े नियम प्रत्येक राज्य की विधानसभा अपने-अपने कानूनों के अनुसार तय करती है. इसलिए अलग-अलग राज्यों में पेंशन की राशि और पात्रता के नियम अलग हो सकते हैं. हालांकि अधिकांश राज्यों में पूर्व विधायक की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान है. उत्तर प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था लागू है, जिसके तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले आश्रित को आर्थिक सहायता दी जाती है.

आमतौर पर विधायक की मृत्यु के बाद पेंशन उस व्यक्ति को मिलती है, जिसका नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में नॉमिनी के रूप में दर्ज होता है. यदि नॉमिनी के रूप में पति या पत्नी का नाम दर्ज है, तो सबसे पहले वही इस पेंशन का हकदार होता है. कुछ परिस्थितियों में आश्रित पुत्र या पुत्री को भी यह लाभ दिया जा सकता है. यदि नॉमिनी से संबंधित कोई विवाद होता है, तो संबंधित विधानसभा सचिवालय नियमों के अनुसार मामले का निपटारा करता है.

उत्तर प्रदेश में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसी पूर्व विधायक के निधन के बाद पात्र आश्रित को पारिवारिक पेंशन के रूप में हर महीने 10,000 रुपये दिए जाने का प्रावधान है. यह राशि पूर्व विधायक को मिलने वाली नियमित पेंशन से अलग होती है और इसका उद्देश्य परिवार को आर्थिक सहयोग प्रदान करना है.जहां तक पूर्व विधायकों की पेंशन का सवाल है, इसकी राशि उनके कार्यकाल पर निर्भर करती है. उत्तर प्रदेश में यदि कोई व्यक्ति एक बार भी विधायक निर्वाचित हो जाता है, तो उसे आजीवन पेंशन का अधिकार मिल जाता है. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, एक कार्यकाल पूरा करने वाले पूर्व विधायक को लगभग 25,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है. इसके अलावा, पांच वर्ष का प्रत्येक अतिरिक्त कार्यकाल पूरा होने पर पेंशन में 2,000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी का प्रावधान है.

यानी यदि कोई विधायक कई बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचता है, तो उसकी पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ती जाती है. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई नेता लगातार तीन कार्यकाल यानी लगभग 15 वर्ष तक विधायक रहता है, तो उसकी मासिक पेंशन 45,000 रुपये तक पहुंच सकती है. इस तरह पेंशन का सीधा संबंध विधायक के कुल कार्यकाल से होता है.विशेषज्ञों का कहना है कि विधायकों को दी जाने वाली पेंशन का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक योगदान देने वाले जनप्रतिनिधियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है. वहीं, पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि विधायक के निधन के बाद उनके आश्रितों को भी न्यूनतम आर्थिक सहायता मिलती रहे. हालांकि, पेंशन से जुड़े नियमों में समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं, इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित राज्य के विधानसभा अधिनियम और लागू नियमों के आधार पर ही लिया जाता है.