Knews Desk– NCERT की स्कूली किताबों से मराठा साम्राज्य का नक्शा हटाए जाने के मुद्दे ने अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र के कई शाही परिवारों के वंशजों, इतिहास प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मराठा साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और उसे पाठ्यक्रम से हटाना देश की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के साथ अन्याय है।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब NCERT की कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के डिजिटल संस्करण से मराठा साम्राज्य का नक्शा हटा दिया गया। बताया जा रहा है कि कुछ समूहों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद यह बदलाव किया गया। हालांकि, इस फैसले को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बिना किसी व्यापक ऐतिहासिक समीक्षा और विशेषज्ञों की राय लिए ऐसा निर्णय लेना उचित नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि मराठा साम्राज्य ने भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में स्थापित इस साम्राज्य ने मुगल शासन को चुनौती दी और देश के बड़े भूभाग पर अपना प्रभाव कायम किया। इतिहासकारों के अनुसार, मराठा शासन केवल एक राजनीतिक शक्ति नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रशासन और सैन्य संगठन का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण था।

इस मामले को लेकर छात्रों, शिक्षकों और कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतिहास को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए, न कि विवादों या दबाव के आधार पर बदला जाना चाहिए। कई इतिहास विशेषज्ञों ने भी यह सवाल उठाया है कि अगर किसी ऐतिहासिक तथ्य या मानचित्र में बदलाव किया जाता है, तो उसके पीछे स्पष्ट अकादमिक कारण और पारदर्शिता होनी चाहिए। अब इस पूरे मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। कोर्ट यह तय करेगा कि NCERT द्वारा लिया गया फैसला उचित था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मराठा साम्राज्य का नक्शा भविष्य में फिर से पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाएगा या नहीं।
फिलहाल इस मुद्दे ने इतिहास, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।