Knews Desk– मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों एक ऐसे हाई-प्रोफाइल मौत मामले की गूंज से भरा हुआ है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत अब सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं रह गई, बल्कि यह मामला डिजिटल सबूतों, मानसिक प्रताड़ना, फॉरेंसिक जांच और कानूनी लड़ाई का जटिल केस बन चुका है।
नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। बताया जाता है कि दोनों की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। दोस्ती प्यार में बदली और फिर शादी हो गई। शुरुआत में सबकुछ सामान्य दिखाई देता रहा, लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद रिश्ते में तनाव की बातें सामने आने लगीं। 12 मई 2026 को ट्विशा अपने ससुराल में मृत पाई गईं। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया, लेकिन परिवार ने शुरुआत से ही इसे संदिग्ध मौत करार दिया।
“मैं फंस गई हूं…” वायरल चैट ने बदल दी पूरी कहानी
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ट्विशा की कथित WhatsApp और Instagram चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। इन संदेशों में ट्विशा अपने दोस्तों से मानसिक तनाव, अकेलेपन और रिश्ते में परेशानी की बात करती दिखाई दीं। एक चैट में उन्होंने लिखा -“मैं फंस गई हूं… तू मत फंसना।”
इस एक लाइन ने पूरे मामले को सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक चर्चा का विषय बना दिया। परिवार का आरोप है कि ट्विशा शादी के बाद लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थीं। कई बार उन्होंने घर लौटने की इच्छा भी जताई थी। हालांकि, ससुराल पक्ष ने इन चैट्स को संदिग्ध बताते हुए दावा किया कि इन्हें एडिट करके पेश किया जा रहा है। इसी को लेकर अदालत में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की फोरेंसिक जांच की मांग की गई।
CCTV फुटेज में दिखे आखिरी पल
जांच में घर की CCTV फुटेज भी सामने आई। वीडियो में ट्विशा को घर की सीढ़ियों से छत की ओर जाते देखा गया। कुछ समय बाद परिवार के लोग उन्हें नीचे लाते दिखाई दिए। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। लेकिन CCTV फुटेज सामने आने के बाद कहानी और उलझ गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, DVR डेटा और FIR में दर्ज समय में अंतर दिखाई दिया। समर्थ सिंह की मां और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि CCTV रिकॉर्डिंग में “2 दिन, 2 घंटे और 20 मिनट” की गड़बड़ी है। उन्होंने जांच एजेंसियों पर डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई। अब SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या DVR में तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर किसी ने रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ की।
मौत के बाद फरार हुआ पति
ट्विशा की मौत के बाद उनके पति समर्थ सिंह अचानक गायब हो गए। पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही है। इस बीच समर्थ ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की, लेकिन भोपाल की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, उनकी मां गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई।
समर्थ सिंह के फरार होने से मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठाने लगे कि यदि यह आत्महत्या का मामला है तो पति सामने आकर जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहा।
परिवार का आरोप: “ये आत्महत्या नहीं”
ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा लगातार मीडिया के सामने आकर इंसाफ की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी बहन को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसकी मौत को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की जा रही है। एक वायरल ऑडियो क्लिप में हर्षित शर्मा और ट्विशा की सास के बीच तीखी बहस भी सुनाई दी। इस ऑडियो ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।
परिवार का कहना है कि शादी के बाद ट्विशा पूरी तरह बदल गई थीं। वह तनाव में रहती थीं और कई बार रोते हुए अपने दोस्तों और परिवार से बात करती थीं।
राष्ट्रपति से न्याय की गुहार
ट्विशा मर्डर केस को लेकर परिवार ने अब राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है और सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अदालत का बड़ा आदेश: शव सुरक्षित रखा जाए
मामले में नया मोड़ तब आया जब भोपाल की अदालत ने ट्विशा शर्मा के शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि शव को डीकंपोज होने से बचाया जाए ताकि जरूरत पड़ने पर दूसरा पोस्टमार्टम कराया जा सके। परिजन लगातार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले पोस्टमार्टम में कई सवालों के जवाब नहीं मिले।
अदालत के आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है।
क्या है “एम्बामिंग” प्रक्रिया?
भोपाल के हमीदिया अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. आशीष जैन के अनुसार, शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए “एम्बामिंग” प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक में शरीर के अंदर विशेष रसायन डाले जाते हैं ताकि शव जल्दी खराब न हो। आमतौर पर दूसरे पोस्टमार्टम, अदालत के आदेश या लंबी जांच प्रक्रियाओं में यह तकनीक इस्तेमाल की जाती है।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि जांच लंबी चले तो शव को सामान्य मॉर्च्यूरी में रखना पर्याप्त नहीं होता। ऐसे में एम्बामिंग बेहद जरूरी हो जाती है।
SIT जांच में जुटी पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT गठित की है। जांच टीम अब कई एंगल पर काम कर रही है—
- WhatsApp चैट की फोरेंसिक जांच
- Instagram मैसेज की सत्यता
- CCTV फुटेज और DVR डेटा
- कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- परिवार और दोस्तों के बयान
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे मानसिक प्रताड़ना, दबाव या कोई बड़ी साजिश छिपी है।
सोशल मीडिया पर न्याय की मांग
ट्विशा शर्मा केस अब सोशल मीडिया पर बड़ा मुद्दा बन चुका है। X, Instagram और YouTube पर हजारों लोग इस केस पर चर्चा कर रहे हैं। कई लोग इसे “हाई-प्रोफाइल कवरअप” बता रहे हैं, तो कुछ लोग जांच पूरी होने तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। डिजिटल सबूतों के दौर में यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि आज किसी मौत की जांच केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रहती। मोबाइल चैट, सोशल मीडिया, CCTV और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं।
मौत, रहस्य और अनसुलझे सवाल
ट्विशा शर्मा केस में अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं-
- क्या ट्विशा सच में मानसिक तनाव में थीं?
- वायरल चैट असली हैं या एडिटेड?
- CCTV समय में अंतर क्यों मिला?
- समर्थ सिंह फरार क्यों हैं?
- क्या दूसरा पोस्टमार्टम नए खुलासे करेगा?
हर दिन सामने आ रहे नए खुलासों के साथ यह मामला और रहस्यमयी होता जा रहा है। अब पूरे देश की नजर SIT जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई है। क्योंकि ट्विशा शर्मा की मौत की सच्चाई अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आई है।