KNEWS DESK- भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला लिया है। महज 15 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने वाले वैभव को आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर अपने माता-पिता के साथ रहने की विशेष अनुमति दी गई है। बोर्ड का मानना है कि कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव संभालने के लिए पारिवारिक सहयोग बेहद जरूरी है।
आईपीएल में अपने आक्रामक प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरने वाले वैभव सूर्यवंशी पहली बार भारतीय टीम के साथ विदेशी दौरे पर जाएंगे। ऐसे में BCCI ने उनके मानसिक और भावनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह विशेष व्यवस्था की है। बोर्ड उनके माता-पिता की यात्रा और रहने का पूरा खर्च भी वहन करेगा।
BCCI के अनुसार, इतनी कम उम्र में अचानक मिली लोकप्रियता, मीडिया की बढ़ती नजरें और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। माता-पिता की मौजूदगी से वैभव को नया माहौल अपनाने में आसानी होगी और वे मानसिक रूप से अधिक सहज महसूस कर सकेंगे।
क्रिकेट इतिहास में इससे मिलता-जुलता उदाहरण तब देखने को मिला था जब 1989 में युवा सचिन तेंदुलकर पाकिस्तान दौरे पर भारतीय टीम के साथ गए थे। उस समय सचिन की उम्र 16 वर्ष थी और उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर उनके साथ मौजूद रहे थे। अब वैभव सूर्यवंशी को भी वैसा ही सहयोग मिलने जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि BCCI के मौजूदा नियम विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के परिवार की मौजूदगी को सीमित करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में खिलाड़ी पूरे दौरे के दौरान अपने परिवार को साथ नहीं रख सकते। लंबे दौरों में भी परिवार के सदस्यों को सीमित अवधि तक ही रहने की अनुमति होती है। हालांकि वैभव की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए बोर्ड ने विशेष छूट देने का फैसला किया है।
इस बीच वैभव सूर्यवंशी के सामने एक बड़ा रिकॉर्ड बनाने का अवसर भी है। 15 साल 71 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुने गए वैभव यदि आगामी सीरीज में पदार्पण करते हैं तो वे भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। यह रिकॉर्ड फिलहाल सचिन तेंदुलकर के नाम है, जिन्होंने 16 साल 194 दिन की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था।
क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब टीम चयन और प्लेइंग इलेवन पर टिकी हैं। यदि वैभव को मौका मिलता है तो वे न केवल भारतीय क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ सकते हैं, बल्कि सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरने वाले भारतीय खिलाड़ी के रूप में नया कीर्तिमान भी स्थापित कर सकते हैं।