Knews Desk– भारतीय रिजर्व बैंक RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर GDP Growth के अनुमान में कटौती कर दी है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से विकास दर के अनुमान को पहले की तुलना में थोड़ा कम किया गया है।
इसके साथ ही RBI ने खुदरा महंगाई (Retail Inflation) को लेकर भी अपना अनुमान संशोधित किया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और आयातित वस्तुओं की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी महंगाई को ऊपर ले जा सकती है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई गई है।
RBI के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है और घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रही है। हालांकि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, निवेशकों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी चुनौतियां आने वाले समय में विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि महंगाई को नियंत्रण में रखना उसकी प्राथमिकता बनी हुई है। यदि कीमतों में तेजी बनी रहती है तो आम लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है और उपभोग मांग भी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण RBI आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती और महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था को कई बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और सरकारी निवेश योजनाएं विकास को समर्थन देती रहेंगी।