स्टेज शो से लेकर टिकट वाले लाइव कॉन्सर्ट तक, कलाकारों की फीस, एडवांस पेमेंट, लिप-सिंक, कैंसिलेशन और रिफंड के पीछे काम करता है पूरा बिजनेस मॉडल। जानिए शो रद्द होने पर किसे उठाना पड़ता है नुकसान।
Knews Desk – उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में गायक दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर हुए विवाद ने लाइव इवेंट इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और दलेर मेहंदी की फीस तथा उनकी परफॉर्मेंस को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद मामला चर्चा में आ गया। दलेर मेहंदी के भाई मीका सिंह ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। दलेर मेहंदी की सेहत को लेकर भी उनके करीबियों की ओर से सफाई सामने आई। इस विवाद ने सवाल खड़ा किया है कि आखिर बड़े स्टेज शो और कॉन्सर्ट कैसे आयोजित होते हैं, कलाकारों की फीस कैसे तय होती है और कार्यक्रम बीच में रुकने या रद्द होने पर नुकसान किसे उठाना पड़ता है।
कलाकारों की बुकिंग और फीस का क्या है गणित?
बड़े कॉन्सर्ट और स्टेज शो के आयोजन में इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां, कलाकारों के मैनेजर, प्रोडक्शन टीमें और स्पॉन्सर अहम भूमिका निभाते हैं। कलाकार की लोकप्रियता, कार्यक्रम की अवधि, शहर, दर्शकों की संख्या और आयोजन के स्तर के आधार पर फीस तय होती है।
कई बड़े कलाकारों के साथ अनुबंध करते समय एडवांस भुगतान की शर्त रखी जाती है। कुछ मामलों में फीस का बड़ा हिस्सा पहले ही दिया जाता है, जबकि शेष भुगतान कार्यक्रम की तय शर्तों के अनुसार होता है। हालांकि, एडवांस की रकम और भुगतान का समय हर कलाकार तथा आयोजन के अनुबंध पर निर्भर करता है।
अगर तय कलाकार आखिरी समय में बीमारी या किसी अन्य कारण से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता, तो आयोजक वैकल्पिक कलाकार की तलाश कर सकते हैं। लेकिन दूसरे कलाकार को बुलाना, उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना और नई फीस पर सहमति बनाना आसान नहीं होता। कम समय में होने वाली बुकिंग महंगी भी पड़ सकती है।
प्राइवेट शो और टिकट वाले कॉन्सर्ट में क्या अंतर है?
लाइव इवेंट मुख्य रूप से अलग-अलग व्यावसायिक मॉडलों पर आयोजित होते हैं। प्राइवेट या स्पॉन्सर्ड शो में किसी कंपनी, परिवार या संस्था की ओर से कलाकार को बुलाया जाता है। इनमें शादी, कॉर्पोरेट कार्यक्रम, निजी संगीत समारोह और सांस्कृतिक आयोजन शामिल हैं। कलाकार की फीस और दूसरी शर्तें आयोजक तथा कलाकार के बीच हुए अनुबंध से तय होती हैं।
दूसरी ओर, टिकट वाले कॉन्सर्ट में आयोजक आम जनता के लिए टिकट जारी करता है। ऐसे आयोजनों में कमाई टिकट बिक्री, स्पॉन्सरशिप और अन्य व्यावसायिक साझेदारियों से हो सकती है। लेकिन इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है, क्योंकि आयोजन स्थल, मंच, साउंड सिस्टम, सुरक्षा, प्रचार और कलाकारों पर पहले से बड़ी रकम खर्च की जा सकती है।
कलाकार के अनुबंध में यात्रा, होटल, स्थानीय परिवहन, मंच की तकनीकी जरूरतों, साउंड सिस्टम और हॉस्पिटैलिटी जैसी शर्तें भी शामिल हो सकती हैं। इनकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह अनुबंध पर निर्भर करता है।
लाइव सिंगिंग और लिप-सिंक में क्या अंतर है?
कॉन्सर्ट में दर्शक अक्सर कलाकार को लाइव गाते हुए सुनने की उम्मीद करते हैं। लाइव परफॉर्मेंस में गायक कार्यक्रम के दौरान वास्तविक समय में गाता है और संगीतकार भी उसी समय प्रस्तुति देते हैं। इसके विपरीत, लिप-सिंक में पहले से रिकॉर्ड किए गए गाने के साथ कलाकार होंठ मिलाता है। कुछ प्रस्तुतियों में रिकॉर्डेड वोकल्स के साथ लाइव गायन भी शामिल होता है।
लंबे डांस सीक्वेंस, लगातार यात्रा, आवाज से जुड़ी परेशानी या तकनीकी दिक्कतों के कारण कलाकार रिकॉर्डेड ट्रैक का सहारा ले सकते हैं। हालांकि, केवल किसी रिकॉर्डेड ट्रैक का इस्तेमाल होने से यह साबित नहीं होता कि पूरी प्रस्तुति लिप-सिंक थी। किसी खास कार्यक्रम में क्या हुआ, इसका निष्कर्ष उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
दर्शकों की अपेक्षाओं और कलाकार के वास्तविक प्रदर्शन के बीच अंतर होने पर विवाद पैदा हो सकता है। इसलिए कार्यक्रम की प्रकृति और प्रस्तुति से जुड़ी शर्तों को स्पष्ट रखना आयोजकों तथा कलाकारों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
शो कैंसिल होने पर किसे उठाना पड़ता है नुकसान?
किसी कॉन्सर्ट के रद्द होने पर नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि कार्यक्रम क्यों रद्द हुआ और अनुबंध में क्या शर्तें तय की गई थीं।
अगर कलाकार बीमारी या किसी आपात स्थिति के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता, तो मेडिकल कारण, फोर्स मेज्योर और कैंसिलेशन से जुड़ी शर्तें महत्वपूर्ण हो जाती हैं। कुछ अनुबंधों में एडवांस लौटाने या कार्यक्रम की नई तारीख तय करने का प्रावधान होता है। वहीं, आयोजक की ओर से कार्यक्रम रद्द किए जाने पर कलाकार की फीस और अन्य खर्चों को लेकर अलग शर्तें लागू हो सकती हैं।
आयोजक को वेन्यू, मंच, तकनीकी व्यवस्था, प्रचार और कर्मचारियों पर खर्च की गई रकम का नुकसान हो सकता है। यदि टिकट बिक चुके हों, तो दर्शकों को रिफंड देने की प्रक्रिया भी शुरू करनी पड़ सकती है। रिफंड की समयसीमा और उसमें शामिल शुल्क संबंधित टिकट की शर्तों, प्लेटफॉर्म की नीति तथा लागू कानून पर निर्भर करते हैं।
कॉन्सर्ट इंडस्ट्री पर कौन-से कानून लागू होते हैं?
भारत में लाइव कॉन्सर्ट के लिए एक ही व्यापक कानून सभी पहलुओं को नियंत्रित नहीं करता। ऐसे आयोजनों पर अनुबंध कानून, उपभोक्ता संरक्षण, स्थानीय प्रशासन की अनुमति, सुरक्षा संबंधी नियम और परिस्थितियों के अनुसार दूसरे कानून लागू हो सकते हैं।
अनुबंध का उल्लंघन होने पर विवाद की प्रकृति और समझौते की शर्तों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, टिकट बेचकर जानबूझकर धोखाधड़ी करने का मामला सामान्य कैंसिलेशन से अलग होता है और तथ्यों के आधार पर आपराधिक कानून लागू हो सकता है।
इसलिए किसी शो के रद्द होने पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर स्थिति में कलाकार को पूरी फीस लौटानी होगी या आयोजक का पूरा एडवांस जब्त हो जाएगा। इसका फैसला अनुबंध, रद्द होने के कारण और लागू कानून के आधार पर होता है।
दलेर मेहंदी से जुड़ा विवाद लाइव इवेंट इंडस्ट्री में पारदर्शिता, कलाकारों की सेहत, प्रदर्शन की प्रकृति और आयोजकों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने लाता है। स्पष्ट अनुबंध, समय पर संवाद और दर्शकों के लिए पारदर्शी रिफंड नीति ऐसे विवादों को कम करने में मदद कर सकती है।