मराठी कॉमेडी फिल्म ‘आशी ही बनवा बनवी’ की शूटिंग का दिलचस्प किस्सा सचिन पिलगांवकर ने माधुरी दीक्षित के क्विज शो में सुनाया। साड़ी पहने सचिन को उनकी अपनी सास भी पहचान नहीं पाई थीं।
Knews Desk – हिंदी और मराठी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और फिल्ममेकर सचिन पिलगांवकर ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक मजेदार किस्सा साझा किया है। माधुरी दीक्षित के क्विज शो ‘कौन होणार करोड़पति’ में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि एक बार फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी सास उन्हें पहचान ही नहीं पाई थीं। सचिन उस वक्त साड़ी पहनकर महिला के किरदार में थे। जब उन्होंने अपनी सास के पैर छूकर उनसे पूछा कि क्या वह उन्हें पहचान नहीं पाईं, तो उनकी आवाज सुनकर सास हैरान रह गईं।
सचिन पिलगांवकर ने बताया कि एक बार उनकी सास फिल्म के सेट पर उनसे मिलने आई थीं। उस समय वह अपनी फिल्म के किरदार के लिए साड़ी पहनकर तैयार थे। उनका हुलिया ऐसा था कि उनकी सास उन्हें पहचान नहीं पाईं। उन्होंने अपनी बेटी और सचिन की पत्नी सुप्रिया को पास बुलाकर पूछा कि उनके बगल में खड़ी महिला कौन है।
इसके बाद सचिन अपनी सास के पैर छूने के लिए झुके और उनसे पूछा, “मां, आपने मुझे पहचाना नहीं?” सचिन की आवाज सुनते ही उनकी सास चौंक गईं। यह पूरा वाकया उनके लिए भी बेहद मजेदार अनुभव बन गया।
‘आशी ही बनवा बनवी’ में महिला बने थे सचिन
यह किस्सा साल 1988 में रिलीज हुई मराठी कॉमेडी फिल्म ‘आशी ही बनवा बनवी’ की शूटिंग से जुड़ा है। फिल्म का निर्देशन सचिन पिलगांवकर ने किया था और किरण शांताराम इसके निर्माता थे। फिल्म की कहानी चार दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रहने के लिए घर तलाश रहे होते हैं। उनकी परेशानी तब बढ़ जाती है, जब मकान मालकिन साफ कर देती है कि वह घर केवल शादीशुदा जोड़ों को किराए पर देगी।
ऐसे में दोस्तों में से दो को महिला का भेष धारण करना पड़ता है। इसी के बाद गलतफहमियों और हास्य से भरपूर घटनाएं शुरू होती हैं। फिल्म अपनी कॉमेडी और कलाकारों के अभिनय के कारण मराठी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिनी जाती है।
सचिन पिलगांवकर ने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। उनकी हिंदी फिल्मों में ‘बालिका वधू’, ‘शोले’, ‘गीता गाता चल’ और ‘शोला और शबनम’ जैसी फिल्में शामिल हैं। वहीं, मराठी सिनेमा में उन्होंने ‘हा माझा मार्ग एकला’, ‘गम्मत जम्मत’ और ‘नवरी मिले नवर्याला’ जैसी फिल्मों में काम किया है।
माधुरी दीक्षित के शो में सुनाया गया यह किस्सा उनके अभिनय और किरदार में ढलने की कला का दिलचस्प उदाहरण है।