ईशान खट्टर ने 28वें बर्थडे पर फैंस को दिया तोहफा, एक्टर ने पिप्पा की रिलीज डेट का किया ऐलान

KNEWS DESK – बॉलीवुड एक्टर ईशान खट्टर आज अपना 28वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं| एक्टर ने अपने बर्थडे पर फैन्स को एक तोहफा दिया है| ईशान की फिल्म पिप्पा का फैन्स बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं| आज ईशान ने फिल्म की रिलीज डेट की अनाउंसमेट कर दी है| ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी| फिल्म में इतिहास के एक ऐतिहासिक पलों की रोमांचक कहानी दिखाई गयी है| फिल्म इस दिवाली 10 नवंबर को रिलीज होगी|

Pippa a rewarding experience: Ishaan Khatter | Bollywood News - The Indian Express

ईशान खट्टर की पिप्पा 

बॉलीवुड एक्टर ईशान खट्टर की फिल्म पिप्पा 10 नवंबर को रिलीज होगी| फिल्म का फैन्स बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं| फिल्म में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गरीबपुर की लड़ाई, यह बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था| आरएसवीपी और सिद्धार्थ रॉय कपूर की रॉय कपूर फिल्म्स के बैनर तले रोनी स्क्रूवाला द्वारा निर्मित और राजा कृष्ण मेनन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में ईशान रियल लाइफ वॉर हीरो कैप्टन बलराम सिंह मेहता का किरदार निभा रहे हैं|

 

 

स्टारकास्ट 

फिल्म में उनके साथ मृणाल ठाकुर, प्रियांशु पेन्युली और सोनी राजदान भी अहम किरदार निभाते नजर आएंगे| ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता की ‘द बनिर्ंग चाफीज’ पर आधारित यह फ़िल्म मेनन, तन्मय मोहन और रविंदर रंधावा द्वारा लिखी गई हैं| फिल्म का म्यूजिक दिग्गज ए.आर. रहमान ने दिया हैं, जो देशभक्ति और बलिदान की इस कहानी को एक मौहाल देता है| पिप्पा का प्रीमियर विशेष रूप से भारत और दुनिया भर के 240 से अधिक देशों और क्षेत्रों में प्राइम वीडियो पर होने वाला है|

पिप्पा नाम रखने की वजह 

इस फिल्म को इसका नाम एम्फीबियस वॉर टैंक पीटी-76 (पलावुशी टैंका) से मिला है, जिसे “पिप्पा” के नाम से जाना जाता था, जो घी के एक खाली डिब्बे की तरह आसानी से पानी पर तैरता है| यह फिल्म देशभक्ति और वीरता की कहानी बताती है, और 45 कैवेलरी टैंक स्क्वाड्रन के कैप्टन बलराम मेहता की खोज करती है| इसका ट्रेलर हमें उस समय में वापस ले जाता है, जब भारत ने पूर्वी मोर्चे पर गरीबपुर की लड़ाई लड़ी थी| मिशन के दौरान उनके लीडर के निधन के बाद कैप्टन बलराम सिंह मेहता ने स्क्वाड्रन की कमान संभाली| अपने भाई-बहनों के साथ, वह युद्ध में फ्रंटलाइन पर थे और भारत की जीत की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी|

वॉर के इस नारे के साथ कि “हम सैनिकों की तरह लड़ते हैं, सैनिकों की तरह मारते हैं, और सैनिकों की तरह मरते हैं” काम करते हुए, भारतीय सेनाओं ने अपना सब कुछ दे दिया, जिससे बांग्लादेश की मुक्ति हुई|

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